लघुकथा -
" बोहनी अउ पुरउनी "
-मुरारी लाल साव
बजार आवत मेडम ला देख के भाजी बेचय्या डोकरी दाई बलाके कहिस " आना मेडम भाजी ले ले l " मेडम आके कहिथे " कइसे देवत हस भाजी ला दाई l"
लेना सस्ता लगाहूँ बोहनी कर दे l"
"10रुपिया जूरी ताय -लाल भाजी l"
'कुढ़ोनी खट्टा भाजी हर "
"दस रुपिया भाग ए l"
मेडम भाजी ल हाथ म गुर्मेटत कहिस -" उल्लर हे पुरो ना l"
"ले पुरो देथँव l"
"अउ पुरो ना "
" महंगा के भाजी ए मेडम "
"ले ना अउ पुरो -तभे लुंहू l"
"लेना हे त ले मेडम " जी के क़रलई ला तोपत कहिस -"
मेडम तै अतेक तनखा पाथस?लइका मन ला कतेक पुरो पुरो के पढ़ा थस?बेरा के बाद आथस बेरा के पहिली चल देथस l बेरा ले जादा हो जथे तोर जी कइसे करलाथे?
मोर तो पइसा के नुकसानी अउ तै फोकट म पावत हस l" डोकरी दाई अइसन कहिके दूसर डहर देखे ला धर लीस l बोहनी घलो होगे मेडम ला पुरउनी घलो दे दिस l
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