Thursday, 30 April 2026

लघुकथा - " बोहनी अउ पुरउनी " -मुरारी लाल साव

 लघुकथा - 

        "  बोहनी अउ पुरउनी "

               -मुरारी लाल साव 

 बजार आवत मेडम ला देख के भाजी बेचय्या डोकरी दाई बलाके कहिस " आना मेडम भाजी ले ले l " मेडम आके कहिथे " कइसे देवत हस भाजी ला दाई l" 

लेना सस्ता लगाहूँ बोहनी कर दे l" 

"10रुपिया जूरी ताय -लाल भाजी l"

'कुढ़ोनी खट्टा भाजी हर "

"दस रुपिया भाग ए l"

मेडम भाजी ल हाथ म गुर्मेटत कहिस -" उल्लर हे पुरो ना l"

"ले पुरो देथँव l"

"अउ पुरो ना "

" महंगा के भाजी ए मेडम  "

"ले ना अउ पुरो -तभे लुंहू l" 

"लेना हे त ले मेडम " जी के क़रलई ला तोपत कहिस -"

मेडम तै अतेक तनखा पाथस?लइका मन ला कतेक पुरो पुरो के पढ़ा थस?बेरा के बाद आथस बेरा के पहिली चल देथस l बेरा ले जादा हो जथे तोर जी कइसे करलाथे? 

मोर तो पइसा के नुकसानी अउ तै फोकट म  पावत हस l" डोकरी दाई  अइसन कहिके दूसर डहर देखे ला धर लीस l बोहनी घलो होगे मेडम ला पुरउनी घलो दे दिस l

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