लघुकथा
“लाँघन”
अम्मा अबड़े भूख लागत हे वो।तीनों लइकन रँधिया के अचरा ला तीरे लागिन।रुकव अभी हेर के देवत हवँ गोड़ धोवत रँधिया हा कहिस।चार -पाँच घर के झाड़ू पोंछा बर्तन करत बारा बज गिस ।मैडम मन ओला खाये बर नाश्ता देहे रहिन हे तेला पन्नी मा भर के धर लेहे रहिस रँधिया हा।सबो ला एक ठन थारी मा ढार दिस।लइकन मन झपट झपट के खाय लगिन।तभेच सोहन हा लड़बड़ लड़बड़ करत आइस अउ लइकन मन ले लूट के खा दिहिस ।लइकन मन रोये लागिन ता उँका गारी देवत बाहिर निकल गिस।लइकन मन के करलाई ला देख रँधिया के छाती फाटे लागिस। रँधिया हा महिना के पंदरा हजार कमा लेवय उही ले घर के खर्चा चलावय।उहूँ पइसा हा दारू के लग्गा लग जावय ओखर घरवाला अखंड दरुहा हावय ।सोहन होश मा राहय ता कुछु बुता काम कर लेवय तहाले पइसा मिले तेला दारू मा उड़ा देवय।मारपीट के रँधिया के पइसा ला घलौ लूट के ले जावय।लुका चोरा के धरे अपन पइसा ले रँधिया अपन घर चलावय तभो ले अइसन कोनों दिन नइ होही जब ओमन दुनो जुआर पेट भर खाइन होंही।जे घर मन मा बुता करे जावय उहाँ हर महिना रँधिया हा उधारी पइसा पहिली ले ले डारे रहय।
चुप हो जावव लइकन मन मोर खाता मा महतारी वंदन के पइसा आ गिस हवय सुने हवँ।आज नहा धो के बैंक जाहूं तुँहर बर खाई खजेना घलो लाहूँ।आज रतिहा हमन पेट भर खाबों।
सिरतोन अम्मा आज हमन पेट भर खाये ला पाबोन छोटकू हा पूछिस।
हाँ बेटा रँधिया हा ओला पोटारत किहिस।
सँझा ऱँधिया खाई खजेना लाइस।आज कुकरी घलौ राँधे हे।लइकन मन हाँस हाँस खावत हे रँधिया हा लइकन मन ला खावत देख मुचकात हे तभे कहाँ ले सोहन हा गरजत घूमरत बादर कस आ गिस रँधिया करा दारू बर पइसा माँगे लगिस।रँधिया हा पइसा नी देंव कहिस ता लात घूस्सा मा मारे लगिस।रँधिया अचेत गिर गिस।आधा रतिहा रँधिया ला होश आइस त देखिस लइकन मन रोवत सुत गय हें। सोहन के कुछु पता नी हे वोहा जम्मो भात साग ला खा डारे हे अउ रँधिया के लुकोय पइसा ला लेग गिस हे।उठके एक लोटा पानी ला गट गट पी उही मेर रँधिया हा आज तीसर दिन लाँघन सुत गिस।
चित्रा श्रीवास
सिरगिट्टी बिलासपुर
छत्तीसगढ़
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