छत्तीसगढ़ मा शक्ति अराधना अउ नवा बछर
- डुमन लाल ध्रुव
छत्तीसगढ़ धरती ला देवभूमि कहे जाथे जिंहा के हर कण मा संस्कृति, परंपरा अउ भक्ति के रंग घुले हवय। इहां के लोकजीवन मा शक्ति अराधना के बहुत गहिरा महत्तम हवय। शक्ति के रूप मा माता दुर्गा, महामाया, बम्लेश्वरी, दंतेश्वरी, अउ अलग-अलग रूप मा देवी के पूजा-पाठ सदियों ले चलत आत हे। इही संग नवा बछर (नववर्ष) के स्वागत घलो बड़े उत्साह अउ श्रद्धा के संग मनाय जाथे। छत्तीसगढ़ मा शक्ति अराधना अउ नवा बछर दूनों एक-दूसर ले जुड़के लोकजीवन ला नवा ऊर्जा अउ विश्वास देथे।
छत्तीसगढ़ मा शक्ति के पूजा बहुत पुरखौती परंपरा हवय। गांव - गांव मा देवी-देवता के मंदिर, देवगुड़ी अउ मड़ई मा लोगन मन माता के अराधना करथे। इहां के लोग मन माता ला अपन कुलदेवी, ग्रामदेवी अउ जीवनदाता मानथे। जइसे-जइसे समय बदलत गे तभो ले शक्ति के प्रति श्रद्धा कम नई होइस बल्कि अउ मजबूत होवत गिस।
नवरात्रि के समे शक्ति अराधना के विशेष महत्तम रहिथे। नौ दिन तक माता के अलग-अलग रुप के पूजा होथे। जंवारा बोए जाथे, घट स्थापना होथे अउ भजन-कीर्तन के संग पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाथे। महिला मन उपवास रखथे अउ परिवार के सुख-समृद्धि बर माता ले प्रार्थना करथे।
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाका मा माता दंतेश्वरी के पूजा खास रुप ले प्रसिद्ध हवय। बस्तर दशहरा जेखर महत्तम पूरे देश मा अलग हवय, शक्ति अराधना के अद्भुत उदाहरण आय। इहां दशहरा मा रावण दहन नई होय माता के आराधना होथे। येखर ले पता चलथे के इंहा शक्ति के पूजा के कतेक महत्ता हवय।
छत्तीसगढ़ मा शक्ति के पूजा सिरिफ मंदिर तक सीमित नई हे। इहां के लोकजीवन मा हर जगह शक्ति के रुप दिखथे। खेती-किसानी के समय धरती माता के पूजा, जंगल मा रहइया जनजाति मन द्वारा प्रकृति के पूजा अउ हर छोटे-बड़े काम के शुरुआत मा देवी के स्मरण ए सब शक्ति अराधना के ही रुप आय। ग्राम देवता अउ माई के पूजा घलो शक्ति अराधना के एक अहम हिस्सा आय। गांव मा जब कभू कोई संकट आथे त पूरा गांव मिलके देवी के पूजा करथे। एखर ले समाज मा एकता अउ सहयोग के भावना मजबूत होथे।
छत्तीसगढ़ मा नवा बछर के स्वागत घलो बड़े धूमधाम ले करे जाथे। इहां के लोगन मन अपन परंपरागत कैलेंडर के अनुसार नवा साल मनाथे जेन ला ‘ हिंदू नववर्ष ’ या ‘ चौत्र नवरात्रि ’ के शुरुआत मा मनाय जाथे। ए समे ले ही नवा ऊर्जा अउ नवा उम्मीद के शुरुआत होथे।
नवा बछर के दिन लोगन मन घर साफ-सफाई करथे, नवा कपड़ा पहनथे अउ मंदिर जाके पूजा करथे। किसान मन अपन खेती के काम के शुरुआत बर अच्छा मुहूर्त देखथे। ए दिन लोगन अपन जीवन मा सुख, शांति अउ समृद्धि के कामना करथे।
छत्तीसगढ़ मा नवा बछर के शुरुआत अक्सर नवरात्रि के संग होथे जेन ले शक्ति अराधना अउ नवा बछर एक-दूसर ले जुड़ जाथे। ए समय लोगन मन माता के पूजा करके नवा साल के शुरुआत करथे जेखर ले पूरा साल शुभ होवय। नवरात्रि के पहिली दिन घट स्थापना करके माता के आवाहन करे जाथे। एला नवा बछर के शुरुआत के प्रतीक माने जाथे। जंवारा के हरियर अंकुर जीवन मा नवा शुरुआत अउ विकास के प्रतीक आय। येखरे सेती नवा बछर मा शक्ति अराधना के विशेष महत्तम हवय।
छत्तीसगढ़ के नवा बछर अउ शक्ति अराधना मा लोकनृत्य, लोकगीत अउ पारंपरिक रीति-रिवाज के सुंदर संगम देखे ला मिलथे। गरबा जइसने कार्यक्रम मा लोगन मन बढ़-चढ़ के हिस्सा लेथें। लोगन मन एक-दूसर ले मिलथे, खुशियां बांटथें अउ अपन संस्कृति ला जिंदा रखथे। ए समे गांव के वातावरण बहुत आनंदमय हो जाथे।
शक्ति अराधना अउ नवा बछर के पर्व हा सिरिफ धार्मिक ही नई सामाजिक दृष्टिकोण ले घलो बहुत महत्त्वपूर्ण हवय। ए समे परिवार अउ समाज के लोगन एकजुट होथे। बड़े-बुजुर्ग मन छोटे मन ला आशीर्वाद देथे अउ आपसी संबंध मजबूत होथे। नवा बछर के समय लोगन मन पुराना गलती ला भुलाके नवा शुरुआत करथे। एखर ले समाज मा सकारात्मकता अउ भाईचारा बढ़थे। ए पर्व के समे बाजार मा रौनक बढ़ जाथे। लोगन मन नवा कपड़ा, पूजा सामग्री अउ सजावट के सामान खरीदथें। कारीगर अउ छोटे व्यापारी मन बर ए समे बहुत फायदेमंद होथे। एखर ले स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होथे। आज के समे मा भले ही जीवन शैली बदलत हवय तभो ले छत्तीसगढ़ के लोगन मन अपन परंपरा ला निभावत हवंय। शहर मा रहइया लोगन घलो नवरात्रि अउ नवा बछर के समे घर जाके परिवार संग त्योहार मनाथे। सोशल मीडिया अउ आधुनिक साधन के माध्यम ले अब ए पर्व के जानकारी अउ महत्व दूर-दूर तक पहुंचत हवय। फेर असली आनंद त आज भी गांव मा पारंपरिक तरीके ले मनाए मा ही मिलथे।
- डुमन लाल ध्रुव
मुजगहन, धमतरी (छ.ग.)
पिन - 493773
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