बईसाखी शब्दावली
-मुरारी लाल साव
हमर छत्तीसगढ़ी अब्बड़ पोठ हे l बारों महीना म अपन अलग शब्दावली के खास महत्व होथे l अभी चलत महीना बईसाख के कुछ आखर ऊपर चर्चा करबो l
1झोला - पर्यायवाची शब्द हरे बजार हाट जाये बर जउन थैला के उपयोग करथन l
तात तात हवा लू लगथे ओला झोला धरना कहिथे l झोला बुखार इही हरे l भारी गरमी के बढे ले झोला लगथे l
झोला धरके स्कूल जाथे जेला बैग कहिथे ओकर आकार भले अलग होथे उहू झोला आय l झोला छाप डॉक्टर घलो बन जथे l भीखमंगा मन घलो झोला धर के घूमथे l
2 झांझ - गरम गरम हवा चलथे तेला झांझ कहिथे इही महीना म चलथे l झांझ ले झोला बुखार आथे l मँझनिया भर झांझ l खरी मँझनिया के मतलब तपती धूप दोपहरी l झांझ म निकले बर पड़य त पहिलीमाई लोगिन मन अकतरिया,पुरुष मन भन्दई पहिरय l अब नंदागे l
3 अंटागे -सुखागे - गरमी महीना म चर्चा होथे l तरिया अंटागे lअंटाना के मतलब तरिया के पानी कम होगे l तरियासुखागे के मतलब तरिया म पानी नइ हे l
4 पझरा -ओगरा गरमी के दिन कुंआ पझरा मारथे l कुंआ बावली सुखाए के बाद ओगरा मारथे l करसा मटका पझरथे l
5 घाम घरी के मतलब धूप के बेरा मँझनीया संझा l बेरा ऊवे के बाद बेरा बुड़े के पहिली, सँझाउती l
6 करसी करसा के पानी बैशाख म फ्रिज असन ठंडा पानी देथे l मटका मटकी बड़े रूप हरे l माटी ले बने होथे आरुग जल पिये ला मिलथे l
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