प्रतिभा संपन्न समीक्षक अउ कवि रिहिस यशवंत मेश्राम ह
हिंदी काव्य संग्रह "खो गया मिल गया" के रचनाकार,प्रतिभा संपन्न समीक्षक अउ आलोचक , साकेत साहित्य परिषद सुरगी,राजनांदगांव के वरिष्ठ सदस्य रहे श्रद्धेय यशवंत मेश्राम जी ल उंकर पांचवीं पुण्य तिथि म शत् शत् नमन हे।
यशवंत मेश्राम के जनम 21 नवंबर 1960 म होय रिहिस। शंकरपुर , वोहा मानपुर -मोहला- अंबागढ़ चौकी के गोटाटोला म व्याख्याता रिहिस।
श्रद्धेय यशवंत मेश्राम अब्बड़ किताब पढ़य। राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक पत्रिका नियमित मंगवाय। बुक डिपो अउ रेल्वे स्टेशन राजनांदगांव के बुक स्टॉल म जाके नवा -नवा किताब ल बिसाय।
हमर साकेत साहित्य परिषद सुरगी के मासिक कवि गोष्ठी अउ परिचर्चा के समाचार ल अखबार मन म पढ़ के
वोहा मासिक गोष्ठी म आय के चालू करिस अउ परिषद म शामिल होय के निवेदन करिस।तीन- चार गोष्ठी म आय के बाद मेश्राम जी ल सदस्यता प्रदान करे गिस।
श्रद्धेय मेश्राम जी ह साकेत साहित्य परिषद सुरगी के मासिक काव्य गोष्ठी अउ परिचर्चा के संगे संग वार्षिक सम्मान समारोह म सक्रियता ले भाग लेवय। उंकर समीक्षा, आलोचना,कविता लेख साकेत साहित्य परिषद सुरगी, राजनांदगांव द्वारा प्रकाशित "साकेत स्मारिका" म प्रकाशित होवत गिस। राष्ट्रीय स्तर के पत्र पत्रिका म उंकर समीक्षा प्रकाशित होवय अउ अब्बड़ सराहे गिस।
राजनांदगांव म श्रद्धेय नरेश कुमार वर्मा, कुबेर सिंह साहू, सुरेश सर्वेद अउ आने साहित्यकार मन संग भेंट करके सरलग साहित्यक चर्चा करे म रमे राहय।
साकेत साहित्य परिषद सुरगी अउ आने संस्था द्वारा आयोजित मासिक परिचर्चा अउ वार्षिक समारोह म एक वक्ता के रूप म वोहा खूब सराहे गिस। मेश्राम जी ह वीरेन्द्र कुमार तिवारी वीरू जी अउ श्रद्धेय नंद कुमार साहू साकेत के" तीजा -पोरा"कविता के तुलनात्मक समीक्षा करिस जउन ह प्रकाशित घलो होइस।
श्रद्धेय मेश्राम जी ह अपन निवास स्थान शंकरपुर, राजनांदगांव म साकेत साहित्य परिषद सुरगी, राजनांदगांव के दू - तीन बेर मासिक गोष्ठी अउ परिचर्चा के मेजबानी करिस। जेमा एक बार महान कहानीकार अउ उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के रचना संसार उपर चर्चा करे गिस जेमा सुप्रसिद्ध समीक्षक प्रो. थान सिंह वर्मा जी माई पहुना के रूप म आमंत्रित रिहिस।
मेश्राम जी के एक निश्चित विचार धारा रिहिस। वोहा अंबेडकरवादी विचार धारा ल जादा महत्व देय।आपसी चर्चा -परिचर्चा के दौरान उंकर विचार धारा ह अउ लेखन म स्पष्ट झलकय। वोहा मनुवादी विचार धारा के विरोधी राहय एकरे सेति वोहा पशु पक्षी मन के नांव ल घलो जाति आधारित रखे के विरोध करिस। "बाम्हन चिरई" ल लेके वोहा कुबेर सिंह साहू ले अब्बड़ तर्क -वितर्क करिस अउ कुबेर जी के तर्क वितर्क ले वोहा सहमत नि हो पाइस।
साहित्य के क्षेत्र म अपन माता पिता ल प्रेरणा माने के संगे- संग वोहा साकेत साहित्य परिषद सुरगी के पूर्व अध्यक्ष भाई लखन लाल साहू लहर के कविता शैली ले विशेष प्रभावित रिहिस। कविता लिखे के प्रेरणा वोहा लहर जी ल मानिस हे। मेश्राम जी ह "खो गया मिल गया"कविता संग्रह म येकर उल्लेख करे हावय। साकेत साहित्य परिषद सुरगी के संरक्षक अउ वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू संग उंकर जोड़ी खूब जमिस। वोहा कुबेर जी संग सरलग साहित्य चर्चा करय। साहित्य चर्चा बर एक दूसरा के घर आना जाना होय। सुरेश सर्वेद के प्रेस ठउर अउ मानव मंदिर राजनांदगांव म चाय के चुसकी के संग जय स्तंभ चौक म एमन घंटों साहित्यक चर्चा करय। महू ह कुछ बेरा ये चर्चा -परिचर्चा के साक्षी रेहे हंव।
साकेत साहित्य परिषद सुरगी ह मेश्राम जी के साहित्य म योगदान खातिर साकेत साहित्य सम्मान ले सम्मानित करिस। मेश्राम जी ह कोनो भी समीक्षा, आलोचना,लेख,कविता लिखय त कुबेर सर जी कर छोंड़य। सर जी ह येला अपना कंप्यूटर म टाइपिंग करके संरक्षित कर लेवय।
कुबेर सर जी अउ यशवंत मेश्राम के सुपुत्र श्री अविना शंकर मेश्राम के उदिम ले मेश्राम जी के दू किताब मानसी पब्लिकेशन्स दिल्ली ले प्रकाशित होय हे। किताब के नाव हावय - कुबेर की रचनाओं में समकालीनता और समकालीन समीक्षा दृष्टि ( आलोचना), एवं आलोचना का मापदंड: हत्या ( आलोचना)। ये दूनों किताब अउ कुबेर सर जी के किताब के विमोचन कार्यक्रम 1 अप्रैल के प्रेस क्लब राजनांदगांव म साकेत साहित्य परिषद सुरगी डहन ले रखे गिस। कार्यक्रम म उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार डा. जयप्रकाश साव, दादू लाल जोशी, विनोद साव, संजीव तिवारी, कुबेर सिंह साहू ह जिहां यशवंत मेश्राम जी के भाषा अउ शैली पर प्रकाश डालिस त दूसर कोति उंकर व्यक्तित्व ऊपर चर्चा करिस। कुबेर जी कहिथे कि -" मुक्तिबोध, विनोद कुमार शुक्ल जइसे मेश्राम के घलो अलग भाषा - शैली हे।"
5 अप्रैल 2021 म कोरोना के चलते उंकर देहावसान होगे। श्रद्धेय मेश्राम ल शत् -शत् नमन हे।
ओमप्रकाश साहू 'अंकुर "
सुरगी, राजनांदगांव।
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