Thursday, 30 April 2026

चार पर्यटन स्थल एक दिन म-4( यात्रा संस्मरण) -----------------------

 चार पर्यटन स्थल एक दिन म-4( यात्रा संस्मरण)

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एक ही दिन म चार जगह महादेव अउ देवी माँ के दर्शन के कल्पना नइ करे जा सकय  फेर हमन करेन।


बहुत दिन ले सोचत रहेंव के घटा रानी और जतमाई  जा सकतेंव  त जातेंव।  घटारानी म पहाड़ी चढ़ना परथे अउ जतमाई म तीन चार सौ सीढ़ी उतरे बर परथे। ये  दूनों जगह झरना वाला आये।  कई जगह म पानी बोहावत रहिथे। बारीश के दिन म तो सीढ़ी उपर ले ऊपर के पत्थरा ले नीचे पानी बोहावत रहिथे। नवम्बर दिसम्बर तक इहाँ पानी बोहावत देख सकथन। जब मैं गे रहेंव त बहुत कम पानी दिखाई दिस।


25 मार्च के आशा गुप्ता  कहिस काली रविवार के पंचमी हे त कोनो जगह घूमे बर चलबो। मै हाँ कहि देंव फेर मोला  चिंता होगे काबर के  जिहाँ भी घूमे बर जाबो त वंउहाँ चले बर तो पड़ही, सीढ़ी चढ़ना उतरना नइ कर सकत रहेंव हंव।


कल 26 मार्च पँचमी के दिन फोन  करिस करीब सवा नौ बजे " भाभी आधा घंटे में तैयार हो जाना अपन कहीं बाहर चलते हैं। आप मिर्च खाते नहीं हैं तो होटल का नहीं खायेंगे इस कारण अपने लिये कुछ खाने का रख लेना।" मैं उही समय चाय रोटी  खाये रहेंव , मोर तो बिहनिया के इही नाश्ता राहय। जल्दी से आधा कटोरी चावल बनायेंव अउ चार रोटी बनायेंव। दूनो ल आचार अउ दूध के साथ पैक करके रख लेंव। सवा दस बज गे, ग्यारह बज गे जब साढ़े ग्यारह बजिस त मैं दूध भात अउ आचार  खा लेंव। बारह बज गे तब मैं आशा ल फोन करेंव त ओ ह  बोलिस "आप घर के बाहर आ जाओ हम लोग आ रहे हैं।"


मैं बाहर आ के खड़े हो गेंव उही बेरा म तुरंत आशा अउ ओखर पति दुर्गेश कार लेके आ गें। मैं बइठ गेंव फेर अंजू अग्रवाल के घर गेन । वहु तैयार रहिस हे। अब हम चार झन हो गेन। हमन दोस्त आन, हमर दोस्ती ल पैतीस साल हो गे हावय।


कार म बइठे के बाद पता चलिस के हमन  घटारानी जाथन। राजिम ल पार करके हमन आगे बढ़ेन। नदी म ये बछर बढ़िया पानी भरे रहिस हे। लक्ष्मण झूला बहुत सुंदर दिखत रहिस हे। हमन जइसे जइसे आगू बढ़त गेन त जंगल दिखे ले लग गे। ओखर गहनता घलो दिखे ले लगगे। हमन करीब ढाई बजे  घटारानी पहुँच गेन। उहाँ दू डाहर ले जाथें एक ऊपर डाहर ले जाके नीचे उतरथें अउ दूसर रद्दा आये जिहाँ  नीचे ले ऊपर डाहर  जाथें। हमन नीचे वाला रास्ता ले गेन।


कार ले उतरते ही सामने में भी पार्किंग रहिस हे। ओखर बाद दूनों डाहर दुकान रहिस हे।  सीढ़ी ले चढ़त -चढ़त  हमन  आगू बढ़त रहेन। दो तीन फीट चौड़ा सीढ़ी रहिस हे। मैं धीरे धीरे चलत रहेंव। सामने रास्ता में ही लोगन मन खाना खावत रहिन हें। भंडारा चलत रहिस हे। पुराने तरिका के चूल में लोहा के बरतन चढ़े रहिस हे। ओमा बड़े बड़े कुंदा लगे रहिस हे जेला पकड़ के उतारत चढ़ावत रहिन हें। दू बांस म टोकनी ल बांध के ओ बरतन के पानी म डुबावत रहिन हें। बरतन म पानी भरे रहिस हे। टोकनी म चावल डालत रहिन हें। छै फीट ले भी लम्बा बरतन म चार या पाँच टोकनी डुबे रहिस हे। सब म चावल बनत रहिस हे। चावल जब पक जाये त ओमा बंधे बांस ल पकड़ के   निकाल लेवत रहिन हें। गर्म गर्म खाना सब खावत रहिन हें। दाल भात अउ सब्जी रहिस हे।


ओखर आगे ही एक देवी के मंदिर रहिस हे। ओ मंदिर के सीढ़ी म मैं बइठ गेंव। ओखर सामने में ही दूसर डाहर शिवजी के मंदिर रहिस हें। मैं उहाँ जाके दर्शन करके आ गेंव अउ देवी के मंदिर के सीढ़ी उपर बइठ गेंव। बाकी तीनो झन पहाड़ी के ऊपर देवी मंदिर म देवी के दर्शन बर चल दिन। बहुत ही घुमावदार अउ खड़ा खड़ा सीढ़ी रहिस हे। मैं थक गे रहेंव अउ अतेक खड़ी ऊंचा सीढ  चढ़ना कठिन रहिस हे त नीचे में ही बइठे रहेंव। एक घंटे के बाद म सब झन दर्शन करके वापस आ गेन।  उंखर संग मैं कार तक आ गेंव। उहाँ अपन-अपन टिफिन खाना चाहत रहेंन फेर जतमाई म खाबो  कहिके जतमाई डाहर बढ़ गेन। लहुटत रहेन त मंदिर के तीर में ही एक बोर म सबमर्सिबल पम्प चलत रहिस हे त हमन सब झन उहाँ हाथ पैर धो के ताजा हो गेन अउ कार म आगे बइठ गेन, कार तेजी से बढ़ गे। 


बहुत ही घना जंगल रहिस हे। रद्दा ल देखके  केशकाल के घाटी के सुरता आगे। खड़ी चढ़ाई अउ खड़ा ढाल होये के कारण एक मोटर साइकिल वाला गाड़ी नइ चढ़ा सकिस अउ गिर गे। उही बेरा म तीन झन पैदल आवत रहिन हे तेने मन ओला उठाइन। हमन  इहाँ ले सात किलोमीटर दूरिहा जतमाई माता के दर्शन बर जावत रहेन। रद्दा म "दातरैंगा गाँव का डैम " घलो देखेन। जंगल के बीच म पानी के बहुत ही सुविधा रहिस हे। बिहनिया ले बदली रहिस हे, इहाँ ले निकलेन वइसने ही तेज हवा चले ले लग गे। अइसे लगत रहिस हे के बारीश होही। मोला लगत रहिस हे के मोर मन के खुशी ल इंद्र देव महसूस करत हावय अउ मोर से मिले बर आवत  हावय। पर मैं तो कार के अंदर म रहेंव।


इहाँ  " जतमाई सात किलोमीटर "के बोर्ड लगे रहिस हे इहाँ ले एरो ल देखत- देखत हमन साढ़े तीन बजे जतमाई पहुँच गेन। पूरा मंदिर रोड ले ही दिखत रहिस हे। लेफ्ट में मंदिर जाये के रद्दा रहिस हे अउ राइट डाहर बहुत अकन दुकान अउ होटल रहिस हे। हमन पहली एक होटल म बइठ गेन खाना खाये बर। हमन  सबो झन अपन- अपन घर ले रोटी सब्जी लेके आये रहेन। हमन उहाँ बइठ के खाना खायेन अउ उहाँ  टॉयलेट नवा बने रहिस हे ओखर घलो उपयोग करेन। खाना खाये के बाद चाय पीयेन। मैं राजगीर के लड्डू खरीदे रहेंव ओला ले के आये रहेंव, ओला खायेंव। अब हमन  रोड पार करके मंदिर जाये के रद्दा म आ गेन। इहाँ बड़े से गेट लगे रहिस हे। एक बरगद के पेड़ लगाये हावंय अउ ओखर चबुतरा बनाये हावंय जिहाँ लोगन बइठ सकथें। येखर बाद म जतमाई लिखे हावय अउ बड़े से गेट हावय। गेट के बाद नीचे उतरे बर सीढ़ी शुरु हो जाथे। बहुतेच्च जंगल असन पेड़ उगे हावय।हा हा हा जंगल ही है। आगू बढ़ते गेन रद्दा म एक शिव मंदिर रहिस हे, ओखर दूसर डाहर बड़े से कमरा अउ बरामदा रहिस हे। जिहाँ  ज्योत जलत रहिस हे। 'ऊ ' के आकार म कलश रहिस हे। दो ढाई हजार के करीब ज्योत जलत रहिस हे


फेर आगू बढ़ते गेन एक जगह म कुछ ज्यादा बड़े गढ्ढा रहिस हे उहां तीन मंदिर रहिस हे। उहाँ सामने म कुंड रहिस हे ओखर सामने ही तीन में से एक मंदिर ह जतमाई देवी के हावय। उहां माँ के  दर्शन करेन। माता जी के मूर्ती के तीर ले पानी बोहावत रहिस हे। जेन ह सीधा सामने के कुण्ड में जावत रहिस हे। इहाँ ये गुफा सरिख मंदिर के ऊपर म घलो देवी के मंदिर रहिस हे। मैं थक गे रहेंव त उहां नइ गेंव। इँहें ले दशर्न करके लहुटे ले लग गेंव। इहाँ ले नीचे के गहराई ह देखे के लायक रहिस हे। ये जगह ह कभू- कभू पचमढ़ी के सुरता देवावत रहिस हे। वापसी म मैं अकेल्ला ही सीढ़ी चढ़े ले लग गेंव। सबो झन एक के पाछू एक आवत रहेन। रद्दा म ज्योति कक्ष के दर्शन करेन। इहाँ दो हजार के करीब ज्योति जलत रहिस हे जेला "ऊ" के आकार म रखे रहिन हें।


हमन उहाँ ले फेर ऊपर चढ़ेन अउ पहिली वाले गेट के पास म बइठ गेन। इहाँ  फोटो खिचवायेन। साथ ही एक अजूबा देखेन-- बेल के पेड़ म नीबू के आकार के सैकड़ों बेल लगे रहिस हे। देखे म नीबू के धोखा होवत  रहिस हे। पत्ता ले पहचानेन के ये ह बेल आये।

इहाँ ले हमन सीधा रोड म आ गेन। कार के आवत ले हमन बरगद के चबूतरा म बइठ  के मजा घलो ले लेन। कार अइस अउ बदले मौसम के संग हमन  कार भितरी आ गेन। तेज ठंडा ठंडा हवा चलत रहिस हे त बने लगत  रहिस हे। अइसे लगत रहिस हे के इंद्र भगवान घलो आशिर्वाद देय बर पानी बरसा  दिही। कइ बछर ले देखे के ईच्छा रहिस हे अउ ये तरह ले अचानक चढ़ के देखे बर मिलही सोचे नइ रहेंव। देखे के सुख छुपत नइ रहिस हे। मन के लहरा ह इंद्र तक पहुँच गे लगत रहिस हे तभे बादल मंडरावत रहिस हे।


अचानक दुर्गेश गुप्ता जी ह ड्राइवर ल कहिस  के "कार गरियाबंद तरफ मोड़ लो। भूतेश्वर महादेव चलेंगें। "पाँच बज चुके रहिस हे। "रात हो जायेगी तो महादेव के दर्शन ठीक से नहीं हो पायेगा " अइसे ड्राइवर बोलत रहिस हे फेर दुर्गेश के मन बन गे रहिस हे के भूतेश्वर महादेव जाना है। मैं चुप बइठे रहेंव। आज के दिन कइसे हे? मन म तीसरा खुशी, एक ही दिन म तीन ईच्छा पूरा हो जाना अइसना तो जीवन म कभू नइ होय रहिस हे। दुर्गेश ह हिम्मत देके अउ हाथ पकड़ के मोला उतारिस चढ़इस।  मोर संतुलन बिगड़ जात रहिस हे त दू बेर गिरत रहेव त ओ ह मोला पकड़िस घलो। हर बेर अतेक शांति से काहय "इतना तो आप चढ़ लेंगें चलो" अउ मैं आगू बढ़ जांव।

29 किलोमीटर के दूरी म गरियाबंद रहिस हे। हमन  खाली रास्ता होये के कारण तेजी से भागत भागत छः बजे उहाँ पहुँच गेन।


रद्दा म गाँव पड़त गीस हमन बहुत जल्दी म रहेन त गाँव के नाम  तरफ ध्यान घलो नइ देन। हमन गरियाबंद पहुँच गेन। अब इहाँ ले आठ किलोमीटर दूरिहा म महादेव रहिस हे। हमर गाड़ी तेजी से भागत रहिस हे त अइसे लगिस के तुरंत पहुँच गेन।  कार ले उतरते ही बायें हाथ डाहर बड़े से महादेव दिखाई दिस। आठ दस झन दर्शन करे बर रहिन हे। कुछ दुकान बंद हो गलत रहिस हे। हमन सीधा महादेव तीर पहुँच गेन। फेर कार ले उतरते ही दाहिना डाहर नंदी जी रहिस हे। वहु ह बहुत बड़े से पत्थर के रहिस हे। हमन जब महादेव तीर पहुँचेन त विश्वास ही नइ होवत  रहिस हे के अतेक बड़ भी महादेव हो सकत हे। ये ह लगातार बाढ़त  हावय। ये ह सबसे ऊंचा महादेव के रिकार्ड म दर्ज हावय। सामने जलहरी घलो रहिस हे। हमन ओखर  आगू म गेन त एक अलग से शिवलिंग रखे रहिस हैं जेखर पूजा लोगन मन करत रहिन हें। हमन घलो पानी डारेंन अउ आक के फूल चढ़ायेन। अगरबत्ती जलायेन। ओ शिवलिंग के बाजू म सीढ़ी ले उतर के गुफा म जाये जा  सकथे। नीचे म छोटे से साफ सुथरा गुफा हावय।


ये लिंग के पाछू म शंकर पार्वती के मूर्ती बने हावय। नवा वर वधु मन इहाँ दर्शन करे बर  आथें अउ आशिर्वाद ले के जाथें। ये अनोखा भूतेश्वर महादेव सच म अनोखा हावय।

ये लिंग के तीर में ही वनदेवी के मूर्ती बने हावय। जंगल के बीच म महादेव हावय त वनदेवी घलो आगे।

बाहिर म बहुत से मंदिर बने हावय। गणेश, हनुमान जी घलो हे। इहाँ हमन ल सात बजगे। अब इंहा ले निकल के सीधा रायपुर ही जाना रहिस हे। 

सालों के ईच्छा ये तरह से एक झटका म पूरा हो जही सोचे भी नइ रहेंव। लोगन कहिथें  के दर्शन बर जब भगवान के ईच्छा होही तभे जा पाबो वरना कोई न कोई रुकावट आते रहिही। मोरो संग अइसने कुछ होइस होही। मोर ये दर्शन के माध्यम बनिन आशा अउ दुर्गेश गुप्ता। मोर संग छोड़बे नइ करिन।


इहाँ ले निकल के " अमृततुल्य चाय " पीये बर राजिम डाहर निकल परेन। पुल ले लक्ष्मण झूला बहुत ही सुंदर लगत रहिस हे। हमन उतर के फोटो खिंचवायेन। ओखर सुंदरता ल देख के अपने आप ल रोक नइ पायेन। उहाँ पुल म  उतर गेन।  मौसम ठंडा होगे रहिस हे। बहुत ठंडा ठंडा हवा चलत रहिस हे। हमन बहुत अकन फोटो खिंचवायेन। फोटो खिंचवावत बेरा म पुल कांपत रहिस हे याने हिलत रहिस हे। मन म  डर आवत रहिस हे। भूकम्प के आभास होवत रहिस। उहाँ ले हमन अभनपुर बर निकल गेन। आठ बज चुके रहिस हे।

घड़ी के सूई हमर अनुसार न चलके हमर समय ल बचावत चलत रहिस हे। ड्राइवर के संतुलित गाड़ी चलाना अउ घड़ी के हमर समय ल बचा के चलना एक साथ होवत रहिस हे।


राजिम म उतरे के बाद अइसे लगिस के मन की संतुष्टि ल ही मौसम ह बतावत हावय। अभनपुर जावत तक बारीश होय ले लगगे अउ अभनपुर ले पहिली ही बारीश हो गे रहिस हे। गढ्ढा मन म पानी भरे रहिस हे। रविवार होये के कारण बाजार दुकान सब बंद रहिस हे। गाड़ी अपनी मर्जी से भागत रहिस हे। भीगे मन ह बाहिर पानी बन के बरसत रहिस हे। इंद्र के सेना  हमर स्वागत करत रहिस हे। बने बारीश होगे तब हमन अभनपुर पहुँचेन। अचानक ड्राइवर राजू ह  कहिस " मेरे घर के पास की चंडी देवी के दर्शन कराता हूँ।"वाह अब घर जावत जावत फेर एक देवी के दर्शन। अभनपुर ले सात किलोमीटर म राजू ड्राइवर के घर रहिस हे अउ ओखर घर के बाद ही चंडी मंदिर रहिस हे। हमन मंदिर गेन। बहुत बड़े  मंदिर रहिस हे।  बहुत ही खूबसूरत मूर्ती रहिस हे। बहुत ही व्यवस्थित मंदिर रहिस हे। उहां कथा के संग संग नाचा घलो चलत रहिस हे। सालों बाद हमन नाचा देखेन।  देवी म चढ़े साड़ीमन ल तुरंत बेचत रहिन हें। 100,150,200₹ कीमत रहिस हे। कन्या भोज बर 300₹ अउ भंडारा बर 100₹ रखे गे रहिस हे। हर मनखे पइसा देय के हिम्मत कर सकत रहिस हे। इहाँ ले निकल के हमन  कमल विहार ले होवत साढ़े नौ बजे रायपुर पहुँच गेंन।


एक लम्बा यात्रा अउ चार दर्शनीय स्थल ल एक ही दिन म शांति के साथ घूम लेन। मौसम ह साथ दिस, बदली रहिस, बारीश घलो होगे। भगवान ह मोर दिल के पूरा ध्यान रखिस।  मोर संगवारी मन संग तीस बछर  के साथ रहिस हे तभे तो ये कठिन यात्रा ल पार लगा दिन। शायद ये दोस्ती उपर घलो इंद्र देव खुशी म बरस परिस होही।

सुधा वर्मा, रायपुर

28/3/2023

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