Thursday, 30 April 2026

सोंच*

 *सोंच*

    आदमी औरत घर ले अलग जगा किराया के मकान म राहत रिहिस। औरत घर के काम बुता म भुलाय राहय। आदमी बहिरी ले चिल्लाथे देख तो जी बाबू जी आय हे।औरत अनसुना कर देथे। आदमी फेर चिल्लाथे देख तो जी बाबू जी आय हे।औरत झल्ला के कथे त मे काय करों। आदमी फेर चिल्लाथे देख तो जी तोर बाबू जी आय हे।औरत लकर -धकर निकल के पांव परत कथे पहिली नी बताते मोर बाबू जी आय हे। बाबू बेटी ल एक चटकन देथे अऊ कथे तोर बाबू बाबू आय अऊ दमाद के बाबू?

        फकीर प्रसाद साहू    

        फक्कड़ सुरगी 🙏


लघुकथा - 

     "का ले के जाबो"

       -मुरारी लाल साव 

" मर जबो त का लेके जाबो काला लेगबो तेमा ? 

मोर डहर ले,धर ले बेटा l" सुरजा डोकरी दाई मया ले दू किलो लौकी ला झोला म डार दिस जिद करके l बहुत मना करिस बिसाहू ह, तभो ले नई मानिस  सुरजा दाई ह l सौ रुपिया निकाल के देंवत रहिस -धर ले,धर ले,नई धरिस l बात लौकी के नोहय न पइसा के l बात ओकर हिरदे म पल पलावत संस्कार हरे lदस साल के पहिली रसोइया के बूता करे बर बलाये रहिस मध्यान भोजन म काम करत रहिस l उँहा के बूता ल छोड़ के सब्जी भाजी बेचे बर पसरा लगावत रहिस lबहुत दिन बिसाहू के भेंट होइस l 

   ओकर अंतस ले निकले गोठ  " मर जाहूँ त काला लेगबो? " गुन्तेच रहिस बिसाहू आज तक l ऊपर कोती गेहे, तेन कुछु नई लेगे हे lन राजा कुछु लेगे हे न रंक l मया घलो छूट जथे फेर बिन आशा के बिन स्वारथ के काबर अइसन कहिके दिस होही मोला? ए कइसन मया!जउन बोझा म लदाये बरोबर लागत हे l  लागा बोहाके चल दिस l ओकरे सुर म उही गोठ के रद्दा म  बिसाहू चलत रहिस l 

"मर जबो त का लेके जाबो? "

एक दिनके बात ला घलो सुरता करथेl स्कूल के एक नान्हे लइका ल बला के कहिस -'ले बेटा, ये दे पुस्तक कॉपी पेन अउ कपड़ा  धर l

बने पढ़ लिख l" 

 नान्हे लइका कइथे -" मंय नई मांगत अँव l " बिसाहू कहिस बिन मांगे देवत हँव जान तोर प्रतिभा ला देख के -"तोला जरूरत हे बेटा l" 

ले दे के धरिस l 

दिन बीतगे l ओहर कक्षा पास गे l ओकर  बाद ओ लइका दूसर लइका दे दिस पुस्तक ला पढ़े बर तोर काम आही l 

फेर उही सुरता रहि  रहि के बिसाहू ल आथेl 

"मर जबो त लेके जाबो? "

सुरजा के बताये रद्दा बिन स्वारथ के दे के गुन परम्परा आघू बढ़त जात हे l ओकर फोटू के आघू म खड़े खड़े श्रद्धा के फूल धरे सोचत रहिस बिसाहू मने मन पोठ घलो होवत रहिस l सबके मन म हिर्दय म कुछ देये के प्रेरना होवत रहय l सुरजा दाई के आत्मा ला शान्ति मिलही l



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*दिखावा*

सड़क तिर म चाहा ( चाय)वाला कर एक झन मनखे सूटबूट म कार ले उतरिस अऊ एक कप चाहा मांगिस।वोला देख के चाहा वाला पूछिस बहुत परसान दिखत हस साहेब।वो मनखे ह कथे हां।फेर आपमन बहुत खुश दिखत हो? चाहा वाला कहिथे हां सहाब हमला न जादा दौलत कमाय के टेंशन न दिखाय के।जतिक कमाथन वोमा घर परिवार के हंसी खुशी गुजारा चल जथे।


        फकीर प्रसाद साहू                         फक्कड़ सुरगी 🙏


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*फैसला*

समारु अपन बेटी ल ओकर संऊंक के पूरा होवत ले सोसन भर पढ़ाईस।बाढ़े बेटी के फिकर तो दाई ददा ल होबे करथे।पढ़हत -पढ़हत बर बिहाव के उमर घलो होगे।ददा ह बेटी ल कथे,बेटी सगा मन घला (तको)पूछत हे ऐसो बिहाव कर देतेन।बेटी कथे अपन ददा ल अब मे हुशियार(जानेसुने के लइक)हो गे हों।अपन बने बिगड़ें के फैसला मे खुद कर सकत हों ।

        फकीर प्रसाद साहू 

         फक्कड़ सुरगी 🙏 

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लघुकथा - 

       " मुख्य अतिथि "

          -मुरारी लाल साव 

  पोस्टर के एक कोती के छोर ला धरके  शब्बू ऊपर खम्भा म टांगे बर चघिस l दूसर कोती के छोर ला  रमन्ना धरे गोठियावत रहिस -"तीन सौ पोस्टर ला बांधना हे एकर साइज अलग अलग हे l कोन मेऱ कोन साइज के लगही छाँटत म टाइम सिरा जथे l "

     ऊपर ले शब्बू ह कहिथे -"इही बूता म हमर रोजी रोटी चलत हे,पेट चलत हे रमन्ना कोनो साइज के हो टांगना हे अउ का करना हे?"

"अरे भैय्या जघा बनाये ला पड़थे l" 

"ला ना घुसा, मुड़ी तरी ऊपर कुछु होय l"

" मुख्य अतिथि के पोस्टर हे फब बे करही l "

"हमला का मतलब,  साइज ले कोन का  साइज हे?"

"मतलब हे रे !" मुख्य अतिथि आथे बुलाथे तेखर से मांग के वसूल डरथे खर्चा ला l"

"तभे तो अतका टंगवावत हे फोटो के पोस्टर चारो मुड़ा दिखना चाही हाँ ना!" फेर रमन्ना कहिस -" 

घोसना नई करही त देखबे का करही विरोधी मन ?

" जानत सब हे, इही पोस्टर फोटो म चीखला  लद्दी फेंकही डामर चुपरही, चिरही,जानेस l" शब्बू कहिस l 

रमन्ना -" तभे मुख्य अतिथि मन अपन तिथि म आवय नहीं l दू पइत होंगे झगरा होवत l "

शब्बू -" झगरा  अतका होथे दू फाड़ हो जथे l "

"एला काबर बुलावत फेकू ला l  खूब माल झोरे हे l"

अइसे कहिके लड़थे l मुख्य अतिथि बनाये बर तोड़ फोड़ होथे l आथे तभो लड़थे,जाथे तभो लड़थे अउ नई आवय तभो l" 

मुख्य अतिथि के पोस्टर दाँत निपोर के हाँसत  रहिथे  बिजरावत रहिथे ओकर फोटू फरक पड़थे l "

रमन्ना अउ शब्बू दूनो हँसत कहिथे -" हमर टांगे पोस्टर ए   मुख्य अतिथि इही हरे  l "



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