Thursday, 25 January 2024

नानकुन कहानी " जी काल्कुत "

 नानकुन कहानी

   "   जी काल्कुत "

हफ़रत आके मुड़ के झिटी लकड़ी के बोझा ला पटकीस l गमछा म मुँह कान पोछत मांगिस -ला पानी दे वो l मुंगेसरी पानी देवत पुछिस -थोकिन थिरा नई लेतेव जी l

" काला थिराबे, बोझा उठाइय्या नई मिलय l"

मंगल साँस भरत कहिस l

नई बांचय अब जंगल ह मुंगेसरी l गाड़ी म जोर जोर के

डोहारत हे ट्रक टेक्टर के लाइन लगे हे l मशीन ऊपर मशीन आरा असन l देखते देखत खडे रुख धड़ धड गिरत हे l डारा थांगा छिनावत हे l पीड़ाउरा पोठ पोठ ला भरत हे मशीन म l "

जी काल्कुत होगे दाई कइसे रहिबो कइसे जीबो ते l मुंगेसरी के गोठ पूरा नई हो पाये रहिस मंगल कहिथे -" लकड़ी असन हमू मन ला जोर के  ले जतिस

तेने अच्छा हे l"

 "गाँव ल उजर ही कहिथे l "

"उजरगे बेंचागे भैरी, दूसर जघा जाये ला परही  l "

"गाय -बछरु,छेरी- पठरू ला --l"

"अपन जी ला देखबो कि --l"

मुंगेसरी कहिस कुछु हो जय अपन धन ला नई छोड़न l"

" जी के जंजाल नई करन जी काल्कुत म जियत हन अउ झंझट नई पालन l"

बछरु के चिल्लाये के अवाज आइस l मुंगेसरी  गाय बछरु ल दुलारत कहिस-

"तहीं चिल्ला गऊ माता, तोरे करलाई जादा लगत हे l "

 मुंगेसरी के आँखी ले आँसू चुहे ला धर लीस l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

गुनान

 गुनान 

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     कार्ल मार्क्स हर धर्म ल अफीम के नशा कहे रहिस । 22 जनवरी के जानेवं देश दुनिया , लइका सियान , गरीब अमीर सबो राम मय होगिन त कहि सकत हन राम नाम के नशा मं झूमे लगिन । 

    हमर देश के जन मन मं राम अउ कृष्ण दूनों जुग जुग ले आसन जमाए बइठे हें । दूनों झन अवतारी पुरुष आयं ..दूनों झन श्याम सरोरुह गात माने सांवर रहिन । राम त्रेता युग मं रावण ल मार के अन्याय के शमन करीन त राम राज्य के स्थापना के संगे संग समाज ल , परिवार ल आदर्श के रस्ता देखाईन तभे तो मर्यादा पुरुषोत्तम  कहाइन । द्वापर मं जनमिन कृष्ण , कंस के अत्याचार ले लोगन ल बचाये बर कंस वध करीन , महाभारत युद्ध के सर्वेसर्वा तो उही रहिन । 

मन गुने लगिस त दूनों मं अंतर का रहिस ? उत्तर मिलिस राम भाव आयं त कृष्ण कर्म आयं कइसे ? राम समाज बर आदर्श बेटा , भाई , सखा , पति , राजा रहिन उंकर आचरण , व्यवहार आज भी अनुकरणीय हे । कृष्ण कर्म करे के प्रेरणा दिन ...समय , सुयोग , परिस्थिति के अनुसार आचरण , व्यवहार करे बर कहीन । 

भारतीय जीवन मं राम अउ कृष्ण दूनों के महत्व के बढ़िया उदाहरण देखे बर मिलथे तब जब मरणोन्मुख मनसे ल गीता सुनाथें ...काबर ? जनम मरण या कहिन कर्म बंधन से मुक्ति बर ..। सुरता करे लाइक बात एहर आय के उही मरणोन्मुख मनसे के मुंह मं तुलसी पाना / मंजरी डार के गंगाजल पियाथें अउ राम राम कहिथें अतके नहीं ...अंतिम यात्रा मं राम नाम सत्य है कहिथें । 

   त राम अउ कृष्ण दूनों एके होइन न ? ठीक समझेव मनसे के जीवन मं भाव अउ कर्म दूनों के समायोजन जरुरी हे काबर के भावहीन कर्म अउ कर्महीन भाव दूनों अकारथ हो जाथें । हिन्दू संस्कृति , धर्म , समाज , परिवार , देश राज इही समन्वयवादी परम्परा ल जानत , मानत आवत हे । हमर देश के सभ्यता , संस्कृति के मजबूत आधार आयं राम अउ कृष्ण । 

  नील सरोरुह नीलमणि , नील नीरधर श्याम 

  बसहु सदा सबके हिय , पूरण हो सब काम ।

सरला शर्मा

लघु कथा*

 *लघु कथा*

दसरु बरवट के खटिया म पड़े कल्हरत हे । दसरु के चार झन बेटा हावय । रमउ,भुवन,लच्छू अउ सोनउ।

        " का करत हस गो दसरु कका" डेरवठी बाहिर के भाखा ओरख के दसरु चिचियाथे।" आ....आ....सुजानिक......आ...बइठ" दसरु कांखत सुजानिक ल बुलाके खटिया के तीर म माढ़े टेबूल उपर बइठे के इशारा करथे।

सुजानिक बइठत पुछथे " अउ का हाल चाल से कका ,लोग लइका मन नइ दिखत हे "। 

   " काला बताबे सुजानिक" दसरु कांखत एक लम्बा सांस ले के कइथे "तोर काकी परबुधनिन काल के बात मान के स्वर्ग सिधारगे । बड़े बेटा रमउ खाय कमाय ल परदेश गेहे,वो हां उहें भूला  गेहे । भुवन अपन लोग लइका समेत अलग ठउर म रइथे । लच्छू जुआ चित्ती नशा म भक्क पड़े रइथे अउ सोनउ हा शरीर अउ दिमाग ले दिव्यांग हावय ।

        "मंय समय के मार के दंश झेलत परमात्मा के आस म पड़े हंव सुजानिक.....।" 

अतका काहत दसरु एक गहरा सांस लेवत दसरु अउ सुजानिक उपर कोती ल देखत मने मन सोचें ल लग जाथे " का इही कलयुग ये भगवान"।


अशोक कुमार जायसवाल

भाटापारा

रोज एक पुड़िया व्यंग्य किस्सा - " भगवान कइसे दिखही? "

 रोज एक पुड़िया 

व्यंग्य  किस्सा -

   " भगवान कइसे दिखही? "


तीन आदमी तीनो म मतभेद lतीनो के तीन तरीका l तीनो म तिरिकतीरा l  भगवान कइसे दिखही ?ज्ञान बघारे के उदिम करत रहीस l बिना ज्ञान -ध्यान के,, बिना समझे -बूझे भगवान ला देखे के सऊँख तीनो ल हे l  देख के तो बताय  सबूत के संग l गवाही साखी लेके l अभी तक कोनो नई कहे हे  l कहे हे तेला कोनो पतियाये नइये हे l सबूत चाही देखे हे l इही बहस होवत रहिस ओमा कहिस 

पहिली आदमी -

"भगवान ला देख के मै बताहूँ हाँ ,देख के मै बताहूँ दूनो झन आँखी ल मुँदव l" दू झन विरोध करत कहिस -" तै का बताबे बीता भर ज्ञान हे तोर करा l "

ए ए चलाकी झन चल l हमू ला आथे देखे बर l अकेल्ला तै काबर देखबे? झंझेट के बैठाऱ दीस l

दूसरा आदमी -

"भगवान ला हम दू झन देखबो एक गवाही रही l तभे तो सब पतियाही l"  पहिला आदमी दूनो के विरोध करिस -ए ए उहू गलत होही दूनो सांठ गांठ कर लुहू l दूनो मिलके  कुछ भी कर लुहू l 

लबारी मार दुहू तुंहर का हे l 

तीसर आदमी  दूनों ले डेढ़ हुसियार l उहू ला मौका दीस l अपन  बुद्धि  ले मात देवत 

तीसर आदमी  कहिस -" एक उपाय हे हम तीनो झन आँखी ल मुँद बो l कोनो अउ ला साखी गवाही बनाबो l"

 भगवान ला कोन देखिस 

उही ह बताही, उपाय खोजिस l एक झन कहिस - गवाही 

कुकुर ला बनाबो l कुकुर ल ईमानदार प्राणी हे l जानवर मन  भरोसा करथे,झूठ नई बोले l ककरो पक्ष नई लेवय l सही सही बताही l कुकुर  अपन आदत भूँकना  सूंघना अउ मूतना  ले  फरी फरी कर दीही l एखर ले पता हो जही l कोन देखिस? जेन देखही तौन कुछ तो बोलही ? 

आपस म मान लीस l  तीनो आदमी 

अलग अलग दिशा म आँखी मुँद के बइठ गे l मने मन कुकर ले बिनती करत हे मोला सूंघ दय,भूंक दय, नई ते ---l

एक झन मुंदे बइठे देख कुकुर सुंघिस  ले ओला कुछु नई होइस l दूसर के पीठ ला सुंघिस कुछु चिटपोट नई करिस l डोलिस भर l कुकुर अपन तीसर आदत ला छोड़िस एक टांग उठाके चुर्र --चुर्र --l

तीसर के मुड़ी म पडिस lचिल्लाके कहिस -भगवान  मोला दिख गे  l कुकुर भगागे l

सबूत दिखाके l

मुरारीलाल साव

रोज एक पुड़िया नानकुन कहानी- " बईमान कोन ? "

 रोज एक पुड़िया 

 नानकुन कहानी-

  "   बईमान  कोन  ? "

प्रकृति म सब कुछ हे प्रकृति ले देवी देवता खुश हे, प्रकृति बिगड़ही त बाँच ही का?

तरिया के पार म पहिली बहुत बड़े बड़े रुख राई रहिस l अब नई रहिगे l कुंदरा झोपडी मकान बनगे l तरिया घलो सकलावत जात हे l तरिया के पानी मतलवत जात हे l न तरिया बांचत हे न परिया l

इही सँसो म पीपर अउ बर आपस म गोठियावत रहिस l

दूनो जुन्ना पेड़ बहुत कुछ कहानी ला जानत हे l

पीपर रुख कहिस - हमन ल पोथी पुरान  बंचाईस, नई ते कब के हमर सत्यानाश होगे रहिस l

बर रुख बताइस - भला हो भगवान के हमला शरण म राखे हे l फेर एक ठन अउ बात

भगवान के पूजा पाठ म हमर पान पत्ता ल नई चढ़ाय  l बने हे नई ते?

पीपर सोच के कहिस - परमान तो हमार पास हे l अंतर मंतर वाले मन जानत हे l सबला

 डरहवाके राखे हे l भूत परेत शैतान के वासा l

बर बात ला पुरोवत कहिस - बईमान कोन बनही  हमन ला काट के l इही बेरा चील कौवा मन आगे l तुंहर आसरा म हमू मन साँस लेवत हन l मैनखे मन जान डारे हे इंखर मांस खाना पाप हे l जेन दिन पीपर बर कटे ला धरही जान ले बिनास l 

धरम जाही चूल्हा म l हवा पानी बर लोगन तरस के मरही l पथरा माटी बँचही l

महल अटारी देखे बर के ताय

एक न दिन उकरों पिंडा दान इही मेऱ होही l

बने हे डोकरी दाई रखवारी करत सब ला बताथे l कतको पूजा पाठ कर लेव,दान पुन कर लेव भगवान प्रसन्न नई होय जब ओकर बनाये प्रकृति  ल बँचा के नई रख ही तब तक l


मुरारी लाल साव

कुम्हारी

आज के राशिफल*.

 *आज के राशिफल*.      


      बिना महुरत देखे जनम धरेंन, जीयत भर शुभ महुरत खोजेन अउ बिना महुरत के दुनिया ले बिदा घलो हो जथन। शुभ घड़ी शुभ महुरत खटिया के मुड़सरिया गोड़सरिया घर के मोहाटी बर उत्ती बुड़ती बर बिहिव मा रास बरग जनम बर नामकरन अउ कोन जनी का का बर पंचाँगी पन्ना खोधियाना परथे। अभी तक इँकर शुभ अशुभ फल बताए ले हमर उपर का फरक परथे सउँहत परिणाम देखे बर नइ मिले हे। हमर असन मन वर्तमान के चिंता मा चितियाय परे हवन तौ भविष्य के का गोठ करन। हमर असन कतको हे जेकर आगू दिन बर अँजोर के दउहा नइये। तब समझ जाना चाही कि हम मनहूस घड़ी मा जनम धरे हन। अँधियार मा मुँसवा रेंगथे तेहू हर बिलई कूदे कस लागथे। जेकर उपर बिसवास करना घलो मजबूरी हो जथे। अँधियार मा फूटे कनोजी घलो अपन दसा के करता ला नइ  बताय। तब अँखमुँद्दा  बिसवास करना परथे। अउ नइ करबे तब जे मन पंचाँग लिखत हे कुंडली अउ भविष्य बतावत हे उँकर दुकान के का होही।

         धन धरम अउ धंधा के महायोग के संजोग ले लछमीपति होवत देरी नइ लगे। ये अलग बात हे कि दौलत राम अउ धनसिंग नाम के हर बाढ़ी खाके करजा मा जीयत हे। भरोसा अउ भगति के सँग महादान के पूछी धरके बैतरी पार हो सकत हस तब एकादकनी अखबारी राशिफल पंचाँग उपर घलो मन मड़ा के भरोसा कर। नइ करबे तब इन पंचाँगी मन के पेट अउ परिवार के का होही। बेरोजगारी के दौर मा इँकर हाथ मा कुछ तो काम हावे। झाड़ू राम फेकन कचरा बाई बुधारू मँगलिन खोरबाहरा असन नाम तो बिना पंचाँग देखे जनम धरे के बखत मुँहूँ ले जौन निकल जाय सदा दिन बर पहिचान बन जाय। इही उदुपहा धरल नाम के उपर कभू चंद्र सुर्य ग्रहण के शुभ अशुभ फल के असर नइ होइस। न तो सम्मार शनिच्चर  फलदायी होइस। वोइसे भी जिंकर राशि मा बारोमासीशनिच्चर झपाए हे बाँचे खोंचे देंह के हाड़ा दान करके कते दोष ला कटवाही। पेट भर भर के पेट निकालत  हे। वो मन हमर असन ला दान करतिस ते हमरो शुभ दिन आतिस। फेर अइसन करना तो विधान के खिलाप हे। ज्ञान चक्र ये कथे कि अन्न दान धन दान वस्त्र दान के सँग एक्कइस झन नव ग्रह के सेवक मन ला भोज करवाना परथे। अउ कहूँ अतका करम नइ करे तब जिद्दी शनिच्चर हर तोर नाम अउ राशि के उपर अढ़ई साल ले परिक्रमा करत रही।

             हमर कोती अखबार के एक कोंटा मा रोज राशिफल छपे रथे। बारा महिना मा बारा राशि के फल दसा सबो राशि मा घूमत रथे। जे आज तोर मा छपे हे काली मोर मा रही। फेर अपन ला पढ़के मन ढाढस मा तो रथे कि आज के दिन शुभ हे। हमर परोसी चिंताराम ला रोज अखबारी राशिफल देखे के आदत हे। ओकर राशि मा लिखे गोठ कतका सच होथे उही जाने। आज ओकर राशि मा शुभ दिन के सँग धन प्राप्ति के योग लिखाय रिहिस। फेर ये उल्लू वाहिनी आये तो आये कते डहर ले। झूठ बोले के धोखा देय के गुन तो सीखे नइये। ईमानदारी के थइली मा चिल्हर ला बजा बजा के रेंगके जेबकतरा मन के काम ला असान कर देथे। तभो ले मनभ मा बिसवास तो बने हे कि कोनो डहर ले लछमी उड़ाके आही। इही शुभ दीन चिंताराम बिजली बिल पटाए बर बिजली आफिस गेय रिहिस। भीड़ अउ धक्का धूमी मा चिंताराम के पाकिटमारी होगे। बिचारा बिना बिल पटाय मुँहूँ ओथराय घर आगे। दिन शुभ आउ धन प्राप्ति के योग तो पाकिटमार के रिहिस। सच यहू हे कि जेब कतरा अउ पाकिटमार मन के मन के दिन शुभ चलत हे। चाहे वो राजकीय जेबकतरा होय चाहे प्रशासनिक। इन पाकिटमार मन कभू राशिफल देखके नइ निकले। काबर कि इँकर उपर उल्लू वाहिनी के किरपा सदा बने रथे। ये मन राशिफल देखके निंही धन राशि देखके काम शुरू करथे।

         भरम तो मोरो वो दिन टूटगे जब मोरो राशि मा दाम्पत्य जीवन सुखमय अउ घर मा सुख शांति लिखाय रिहिस। बिहनिया ले घरवाली सँग खटर पटर होगे। जेकर ले चाय नास्ता नइ मिलिस। झगरा के मारे बिना टिफिन के काम मा जाना परिस। अब राशिफल बनाने वाला ला कोसवँ कि धन्यवाद देववँ। हम तो अतका जानथन कि चंदा ला गरहन धरे चाहे सुरुज ला, राशिफल बताये के पहिली जान लेथन कि जतका अशुभ फल होने वाला हे हमरे उपर होही। पंचाँग के सबो पन्ना ला खल्हार निमार के बिहाव के शुभ दिन घड़ी पाख महुरत बताय रिहिस। फेर ये नइ बताइस कि लगिन बर नंगत अकरस पानी गिरही। मोर बिहाव के मँड़वा पंडाल हवा बँड़ोरा मा उड़ागे। तभो पंचाँगी ला दोष नइ दे पायेंव। 

एक झन अचार्य जी मोर कपार के रेखा देखके कहि दिस कि तोर राजयोग के संजोग हे। सिंघासन सुख भोगे के लालच मा पाँच बखत चुनाव लड़ेंव पंच तको नइ बन पायेंव। आखिर मा वो किहिस कि, बेटा जनाधार के खेती मा धनाधार के जल रितोय बर परथे। बड़े बड़े राहू केतू से लेके छोटे छोटे गिरहा के मूँड़ी मा रुपिया माला पहिराय बर परथे। पहिली गिरहा टोरवा पाछू सबके गिरहा टोरइया खुदे बन जबे। ठग फुसारी झूठ लबारी के गुन आगू चलके खुदे सीख जबे। नामकरन के दोष ले देश के तरक्की मा संका होवत हे। भारत नाम मा तरक्की होही कि इंडिया हिन्दुस्तान मा एकर खोज शुरू हो गेहे।

              जिंकर घर रोज धन बरसत हे उँहा शनि पाँव नइ रखे। जिंकर घर उल्लू वाहिनी के छाँव नइ परे उँहिचे सबो राहू-केतु मन डेरा डारे रथे। सुख अउ शांति राशिफल देखके निंही धनबल देखके आथे। रूखा सूखा खाके चैन के नींद सोथन उही हमर शांति आय। बिना राशिफल देखे उढ़रिया भगाके बिहाव करथे तेनो मन सुखी रथे। पंचाँग देखके गुन राशि मिलाय रिहिन तेमन कतको झन रात दिन के तनातनी ले तंग आके मइके मा बइठे हे। कतको झन के ससुरार दहेज के समान देखके दुखी हे। ओकरे सेती कतको सास कंकाली रुप धरके बहू बर खप्पर धरके नाचत हे। पंचाँगी मन कथे कि ग्रह नक्षत्र के असर ले देश मा उथल पुथल हे। राजनीति मा उठापटक हे। अर्थतंत्र डाँवा डोल हे। फेर ये नइ बताय कि व्यवस्था मा झोल हे। निचे से उपर तक के तंत्र मा पोल हे। छोटे सँग बड़े के अमीर सँग गरीब के राशपाटी माड़ जही वो दिन कोनों ला शुभ दिन के राशिफल देखे के जरूरत नइ रही।

         भाग्य रेखा के लेखा जोखा रखइया मन करम रेख के लेख ला कतका पढ़ पाहीं। तकदीर के लेखा जोखा पाप पुन्न दान धरम के बही खाता कोन रँग के सियाही मा लिखाय हे कोनो नइ बताय। फेर अतका बताथें कि मुँदरी के पथरा तकदीर बदल देथे। मोर असन मनहूस ला ये पथरा मिल जाय तब पारा के उन चार घर ला पहिली देतेंव जिकर चुलहा लटपट जरथे। इँकर शुभ दिन बर बनत योजना ला दुरगत करे बर कोनों न कोनों बड़का बँड़वा बिलई मन रसता काटत हे। तभोले जेमन भाग्यरेखा अउ भविष्य फल बताये के दुकान चलावत हे। उँहा हमर असन मन भरम खरीदे के तरीका खोजत रथन। झूठ फरेब अउ भरम के दुनिया मा जीयत हावन, तब तो एकातकनी एकरो उपर भरोसा करे मा का हरज हे। मन मा कुछ देर सही ढाढस तो रही शुभ दिन के। एकरे सेती देश दुनिया के काल चक्र सँग अपनो शुभ दिन जाने बर अखबारी राशिफल ला झाँख लेना चही। हो सकथे धोखा मा आज के दिन शुभ हो जाय।


राजकुमार चौधरी "रौना" 

टेड़ेसरा राजनांदगांव।

दान-पुन के तिहार- छेरछेरा


 

दान-पुन के तिहार- छेरछेरा 


हमर छत्तीसगढ़ म हर तिहार बार के पीछू बड़ निक संदेश छिपे रथे। जेला हर छत्तीसगढ़वासी मन बड़ा जोर शोर, उत्साह मंगल ले मनाये जाथे। चाहे कोई बड़का कारज हो कोई उत्साह के समे हो। सबो माई पीला मिलजुल के कारज ल पूरा करथे अउ तिहार सरी मनाथे। इहि हमर छत्तीसगढ़ के रहवइया मन के संस्कार,संस्कृति आय। जेकर ले आपसी सहयोग, तालमेल, मिलजुल के काम करे के भावना घलो बने रहिथे। अइसन भाव जम्मो  छ्त्तीसगढिया मन के हिरदे म छलकत ले भरे हवय।


अइसने एक ठन प्रमुख तिहार हवे जेला छत्तीसगढ़ म दान पुन के परब--छेरछेरा तिहार के नाव ले जानथन। येला अंजोरी पाख म पूस पुन्नी के दिन मनाथन। ये तिहार दू-तीन दिन ले आघु-पीछू अपन-अपन गाँव के हिसाब से मनाए जाथे। दाई-माई मन बिहिनिया ले खोर-दुआर-अंगना ल लीप पोत के सुभीता हो जाथे। फेर नहा धो के छेरछेरा मँगइया मन बर धान-कोदो ल मँझोत म निकाल के तैयार रेहे रथे।


ये परब दान के परब आये। किसान के अन्न-धन सबो घर के कोठी-डोली म भराय रथे। किसान अपन संग जम्मो जीव बर घलो संसो करत कमाए रथे। ओकर मेहनत के कमाई म चांटी, मिरगा, मुसवा, चिरई-चिरगुन, कीरा-मकोरा के भाग घलो लगे रथे। सबो के भाग मिले के बाद आखिरी में किसान के घर म अन्न ह पहुँचथे। छेरछेरा के दिन किसान मन के घर ले जम्मो झन बर दान के रूप म अन्न ह ठोमा-खोंची जरूर निकलथे। येला पुन के तिहार मानत सबो झन देथे।


छेरछेरा मांगे बर छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, महिला-पुरूष, लईका-सियान सबो मन जाथे। ऐमे दल बना के जाथे।अउ घर-घर के दुवारी म जाके अन्न के दान माँगथे। जेमे गीत घलो गाथे--छेरी के छेरा छेर मरकनीन छेर छेरा, माई कोठी के धान ल हेर हेरा।

अरन बरन कोदो दरन,जभे देबे तभे टरन।

तारा रे तारा अंग्रेजी तारा,जल्दी-जल्दी देवव जाबो दूसर पारा।

अइसे गीत गावत घर के मन ल रिझात अन्न के दान ल मांगते। अउ घर के मन घलो खुशी-खुशी दान देथे।


छेरछेरा तिहार मनाये के कई ठन किवदंती हवे। भगवान शिव जी के माता पारबती जी ल बिहाव के पहिली परीक्षा लेके के सेती घलो कारण बताथे। जेमे शिव जी रूप बदल के पारबती जी के परीक्षा लेवत दान मांगथे। दूसर किवदंती धरती माता के बड़हर किसान मन के परीक्षा लेवई घलो हरे। जेमे एक पहित अकाल पड़थे तब किसान-मजदूर मन बड़हर मन के कोठी-डोली म तो अन्न ल भर देते। लेवई-देवई, करजा-बोड़ी म सबो अनाज सिरा जाथे। पर उँकर मन बर कही नई बचे। जम्मो झन मन मिलके धरती दाई के पूजा पाठ करिन। उँकर पूजा ले खुश होके धरती दाई परगट होईस। किसान-मजदूर मन जय-जयकार करत अब्बड़ खुश होइन। धरती दाई बड़हर किसान मन ल चेतात किहिस कि अपन कोठी के अनाज ल छोटे किसान-मजदूर मन ल दान देके इंकर सहयोग करत रहव। तभे तुंहर अकाल ल सिराही। बड़हर मन धरती दाई के बात मानिस, अउ दान देय के तिहार शुरू होइस। परगट दाई ल शाकम्भरी देवी के रूप मानत आज घलो ओकर जयंती समारोह मनावत धरती दाई के कृतज्ञ करथे।


पहली छेरछेरा म बाजा,मोहरी, पेटी,तबला, बेंजो के धुन म बिधुन डंडा नाचत गावत छेरछेरा तिहार मनाये। एक झन कांवर ल अनाज धरे बर बोहे रहय। दाई-माई मन सुवा गीत गावत अपन दल बनाके छेरछेरा मांगे बर जाए। स्कूल म गुरुजी मन लईका मन संग जाए अउ मिले अनाज ल बेच के स्कूल के लईका मन बर जरूरी समान ल लेवय। अब सबो सुविधा होय के बाद घलो इंकर रंग म कमी होवत हे। अब येकर परती ज्यादा ध्यान नई दिखे। फेर गाँव म आज घलो हमर ये संस्कृति जीयत हवय।


येकर सकलाये जम्मो अनाज ल एक दिन सुभीता होके या बाजार-हाट के दिन सांझ के बेरा पारा भर के मन रान्ध के खाये के घलो रिवाज हवय। जेला रावण भात घलो कथे। ऐमे जतिक झन के दल रथे उतिक घर के मन शामिल होके बढ़िया भात-साग खाथे। अईसन ढंग ले हमर छत्तीसगढ़ी संस्कृति ह एक-दूसर के सहयोग, परेम, सद्भाव ले भरे सुनता के डोर ले बंधाये हवय।


        हेमलाल सहारे

मोहगांव(छुरिया)राजनांदगांव