राष्ट्र के विकास मा महिला मन के भागेदारी
बलं चन्दो बलं सुरियो बलं समण ब्राम्हणा I
बलं वेता समुद्स्य, बलाति बलं इत्थिया II
चंदा बड़ बलवती हे,सुरुज बहुत बलशाली हें, फेर जब हम नारी शक्ति के गोठ करथन त सबले जादा बलवंतिन नारी ही हवय,घर परिवार समाज देश विदेश या फेर युद्ध मा भी नारी मन के भागेदारी येकर प्रत्यक्ष उदाहरण हरेI
जननी सुता भगनी भार्या माँ लक्ष्मी स्वरूप I
गाथा गावय सकल जगत हा, नारी शक्ति अनूप II
नारी कई ठन रिश्ता के पंखुड़ी ल सकेल के एक ठन फूल बनाथे, तब ओकर भीतर पराग भरथे अउ ओकर बीजा असन नवा सृष्टि के बीजा फुटथे, नारी ओमा मया दुलार के रंग भरथे तभे केहे गे हे--
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता I
नारी सलाह देय मा मंत्री,घर के काम बुता मा गृहिणी,धर्म के कारज मा अर्धागिनी,सहनशील मा धरती माता मया मा ममतामयी माँ लक्ष्मी,विलास मा रंभा अउ खेल मा सहेली जइसन होथे,तब जयशंकर प्रसाद जी कहे हे!
नारी तुम श्रद्धा हो,विश्वास रजत नग पगतल में
पीयूष श्रोत सी बहा करो,जीवन के सुंदर समतल में
नारी मन ल सौंदर्य प्रकृति ले वरदान के रूप मा मिले हे, सब अपन संस्कृति अउ सउँख अनुसार रिकिम रिकिम के गहना गुरिया पहिन के सजथे अउ सँवरथे, मया दया करुणा के ओढ़ना ओढ़े नारी चुकचुक ले सजे सँवरे सबके मन ला मोह लेथे I
आज अइसन कोन्हो क्षेत्र नइये जेमा नारी मन अपन योगदान नइ देवत हें, सामजिक हो, राजनीति हो,परिवार निर्माण,राष्ट्र निर्माण हो,आर्थिक उन्नति अउ देश के विकास बर घर ले निकल के अपन जिम्मेवारी निभावत हें I प्राचीन इतिहास पौराणिक कथा मा भी देख लव पति के जान बचाय खातिर माता सती यमराज ले भिड़गे रिहिस Iअउ जब तक सत्यवान के काया मा जान नइ अइस तब तक पाछू नइ छोड़िस,अइसन कतको शौर्य गाथा हे जेन हम सब ला रद्दा देखावत हे I
हम मइनखे मन बर हमर राष्ट्र ईश्वर के देय सुग्घर उपहार आय, अउ ओकर रक्षा करना,नाँव ला ऊँच अगास मा पहुचाना हमर मनके फर्ज बनथे I अउ ये काम ल पूरा निष्ठा ले करे ले लागहीI कतको वीर पुरुष मन राष्ट्र हित बर अपन जान के बाजी लगा दिन,उहें नारी मन तको अपन राष्ट्र ल सुघ्घर सुग्घर शिशु फूल ले सजाइन, बेटा मन ल राष्ट्र हित मा काम करे के शिक्षा दिन,बेटी मन ल परिवार समाज निर्माण के शिक्षा दीक्षा देके राष्ट्र निर्माण के नींव रखिन I एक कोती जिहाँ शिक्षिका बनके गियान दिन, त कभू डाक्टरिन बनके घायल बीमार मन के सेवा करिन, त कभू परिचायिका बनके काम करिन I समाज अउ राजनीति मा भूमिका निभा के विधायिका अउ सांसद बन राष्ट्र के जर ला मजबूत करिन I प्रधानमंत्री अउ राष्ट्रपति बनके देश के माथ ल ऊँच करिन आज भी हम देखन त गाँव विकास मा,शहर राज अउ राष्ट्र के विकास मा राजनीति के हर छोटे से बड़े पद मा नारी मन तको अपन परचम लहरावत हें I विश्व निर्माण के नींव रखइया नारी शक्ति आजो हम सब ला नव सिरजन के प्रेरणा देवत हें I पूरा विश्व मा नवा विचार नवा स्तंभ खड़ा करइया मार्गरेट सेंगर,महिला अधिकार बर लड़इया इमिलाइन,नेत्रहीन मन बर आँखी के ज्योति बनिन हेलन केलर,सेवा भाव दया मया के खान मदर टेरेसा येमन अपन तन मन धन लगा दिन Iओकरे रद्दा मा रेंगत कई जोखिम काम म तको महिला मन पाछू नइ रिहिन I श्री मती वेलेंटिना तैरेस्कोवा पहिली अंतरिक्ष यात्री रिहिन,जेन धरती के ४८ बार चक्कर लगाय रिहिन I सुश्री बछेंद्री पाल माउन्ट एवरेस्ट मा चढ़इया पहिली भारतीय महिला आयI अपन देश के उजास ले विश्व ल उजियार करइया मन आज भी हमन ल उर्जा देवत हें I भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व.श्री मती इंदिरा गांधी,पहिली मुख्यमंत्री सुचिता कृपलानी, जय ललिता, सुषमा स्वराज,शीला दीक्षित,राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल अउ कईविदुषी महिला मन के नांव राष्ट्र निर्माण मा अमर रइहीं आज भी देश के सर्वोच्च पद मा श्री मती द्रोपदी मुर्मू सुशोभित हे।
स्वतंत्रता मिले के बाद महिला मन मा आत्मनिर्भरता बाढ़िस, अउ शिक्षा के विकास होय ले हर कारज मा हाथ बढ़ाय के प्रयास करिन I अउ आज अइसन कोनों क्षेत्र नइहें जेमे तो पुरूष के संग कंधा ले कंधा मिलाके काम नइ करत होही, आज के नारी हर क्षेत्र मा आगू बढ़त हे, शिक्षा के क्षेत्र ल देखन चाहे न्याय के या चिकित्सा, गियान, विज्ञान,इहाँ तक लड़ाकू विमान चलावत हेIजब रेलगाडी मा सफर करथन अउ जानथन येला महिला ह चलावत हे,त कतका गरब होथे फिलिम निर्माण,चित्रकला,मीडिया प्रभारी,नृत्यकला आकाशवाणी अउ दूरदर्शन मा कई महिला इंजीनियर कार्यक्रम अधिशासी उद्घोषिका अउ सबले बड़े पद महानिर्देशक के पद मा तको सुशोभित हवय I जब चंद्रयान तीन के सफलता के गोठ करथन त हमर माथ गरब ले ऊँच हो जथे,काबर ओकर सफलता मा महिला मन के बड़का योगदान हवय, जेमे एक नाम रितु श्रीवास्तव जेला राकेट वूमेन तको कहे जाथे I
अउ जब ऑपरेशन सिंदूर के बात करथन त नारी शक्ति के रूप उभर आथे, काबर ये ऑपरेशन मा सीमा सुरक्षा बल के रूप म तैनात हमर बहिनी बेटी मन जम्मू ले लेके पंजाब,राजस्थान,गुजरात के सीमा म सुरक्षा के बेड़ी ताने दुश्मन मन ला गोली ले जवाब दिन, उहें सोफिया कुरैशी लेफ्टिनेंट कर्नल अउ व्योमिका सिंह वायुसेना के विंग कमांडर अइसन साहसी महिला जेन निडरता ले पाकिस्तान ल जवाब दिन Iआज भारत्त मा जन जन के मुख ले उँकर वीरता के गुणगान करत हे I अभी हम इहूँ ल देखेन जम्मू कश्मीर म बने दुनिया के सबले ऊँच रेलवे पूल (चिनाब ब्रिज) ल डिजाइन अउ वोला रूप रेखा दे मा एक महिला प्रोफेसर माधवी लता के बहुत बड़े योगदान रिहिस I जेन राष्ट्रहित के संगे संग हम सब ला अंजोर देखावत हे Iआज गाँव-गाँव मा मितानिन ले लेके गाँव के मुखिया सरपंच विकास के गाथा गढ़त हेअउ महिला मन तको संघरा मिलके स्वसहायता समूह चलावत हे,अउ घर परिवार ला आर्थिक रूप ले मदद करत हे गाँव के विकास म सहयोग करत हे I
साहित्य के कोठी नारी के निक सिरजन ले समृद्ध हे,उखर सिरजन राष्ट्र के आत्मा ल भिन्जोवत जगमग ले उँखर रूप ल निखारत हे I एक कोती नारी शक्ति सामाजिक बुराई ऊपर कलम चलाके सुधारे के उदिम करे हावय, त दूसर कोती नारी समाज के दयनीय दसा ल सुधारे बर समाज के मुखिया मन के आँखी उघारे के काम करे हावय I उहें देशभक्ति मा डूबे उखर शौर्यता के बखान तको करे हावय, सुभद्राकुमारी चौहान के ये कविता आज भी जन मानस के हिरदे मा ऊर्जा भर देथेI
चमक उठी सन संतावन में, वह तलवार पुरानी थीI
बुंदेलों हरबोलों के मुँह से,हमने सुनी कहानी थीI
खूब लड़ी मर्दानी वह तो, झांसी वाली रानी थीI
फेर आजो कई जगा ल देखथन त अशिक्षा के अइसन अंधियारी बादर छाय हे, जेन छँटे नइये तेकर सेती महिला मन के स्थिति कई जगा बड़ दयनीय हे I पुरुष प्रधान समाज म महिला मन संग दुआ भेद कई ठन समाजिक बंधन,घरेलू हिंसा बेटी बेटा मा भेद, दहेज प्रथा, यौन उत्पीड़न,अउ आर्थिक रूप म दूसर उपर आश्रित होय के सेती महिला मन के स्थिति सोचनीय हे I तब मैथलीशरण गुप्त जी के ये पंक्ति के सुरता आथे I
अबला जीवन हाय,तुम्हारी यही कहानी I
आंचल में है दूध और आँखों में पानी I
फेर आज ल देखन त समय बदलत जात हे,शिक्षा के अंजोरी ले बेटी मन हर क्षेत्र मा अपन परचम लहरावत हेIआज दाई ददा मन बेटी अउ बेटा ल समान शिक्षा देवत हे, दुनों मा कोनों भेद नइ राखत बेटी पढ़ही विकास के रद्दा गढ़ही, बेटी बचाओ बेटी पढ़ओ, महिला सशक्तिकरण अउ कई ठन सरकार डाहर ले योजना चलत हेI नारी मन शिक्षित होके अपन अधिकार ल समझय अउ आगू बढ़य तभे तो सबला बनके देश दुनिया ला आगू बढ़ाय के काज ल करही I
चरैवेती चरैवेती प्रचलामःनिरंतरम I
चलते राहव,चलते राहव अउ इही तो जिनगी ये,अउ विकास हमर बर सशक्त कारज आय अउ कहिथन न एक जगा माढ़े पानी म गंध आवत हे, अउ बहत पानी नदिया के धार ह हम ला आगू बढ़े के चलते रहे के संदेश देथेI मइनखे ले परिवार बनथे, परिवार ले समाज अउ समाज ले राष्ट्र के निर्माण होथे I जेमा हम मइनखे पुरुष अउ महिला संघरा मिलके विकास के रद्दा गढ़थन I पाछू बेरा ले प्रेरणा लेके अवइया बेरा के परिवर्तन ल स्वीकारत संघरा हम ला आगू बढ़ना हे तभे हम एक स्वस्थ समाज,मजबूत खुशहाल राष्ट्र के निर्माण कर पाबो I त आवव संघरा आगू कदम बढ़ावन अउ भारत ल मजबूत संगठित बनावनI
संगीता वर्मा
नगरगाँव (धरसीवां)
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