Monday, 5 January 2026

एक खंभा पोस्टर के नाम*. ब्यंग (टेचरही).

 *एक खंभा पोस्टर के नाम*.           

                           ब्यंग (टेचरही). 


         जेन आदमी के छइँहा खूदे के मन नइ करे ओकर फोटू ला बिहनिया अखबार के पहिली पन्ना मा देखे ला परथे।माने तब जान ले कि दिन खराब। देखइया मन यहू कहत होहीं कि कनवा ला भाय नहीं अउ कनवा बिना रहय नहीं। मँय ये सोचके अखबार नइ मँगाववँ कि एमा देश दुनिया के नवा ताजा खबर पढ़े बर मिलही। नहीं, एला मोर गुमटी के भजिया लपेट के बेचे बर मँगाथौं। ओइसे भी कार्टूनिस्ट मन के फोटू मा ही खबर सार रथे। अखबार के पहिली पन्ना आरक्षित कोटा के रथे। जेमा आदरणीय माननीय सम्मानीय जी मन के फोटू सोभायमान रथे। अइसन पनौती मन के बधाई संदेश रोजे देख ले। हम ये सोचत रथन कि कभू तो इँकर श्रद्धांजलि खबर आतिस। फेर का करबे कउँवा के दाँत कटरे ले ढोर लँगड़ा खोरवा तक नइ होवय। मरे के तो बाते छोड़ दे। बदकिस्मती तो ये हे कि नेताजी के शुभकामना संदेश के पोस्टर के बिना होली देवारी घलो शुभ नइ होवय। मोर आत्मा ला तब शांति मिलथे जब पहिली पन्ना ला ही चीर के भजिया चटनी के बोहनी करवाथौं।

             अभी हाले हाल एक झन माननीय जी के जनम दिन रिहिस। बारा पेज के अखबार मा आठ पेज मा  बड़का फोटू के सँग बधाई संदेश ले भरे मिलिस। बाँचे चार पेज मा चोरी दुसकरम सड़क दुर्घटना अउ राशिफल मा उज्वल भविष्य बर ज्योतिष सलाह। जादा हे तौ उही माननीय मन के स्वच्छ भारत बर झाड़ूदार फोटो। इही एकाद झाड़ूदार मन के महतारी के नाम  पेंड़वा लगावत फोटू जेला होत बिहनिया दतुवन समझ के छेरी मन दाँत साफ कर डारे रिहिन ।

                  एक झन राजभक्त स्वामिभक्ति मा बूड़े गिराहिक राजधानी के माननीय जी के जनम दिन मनाये बर काम-धाम छोड़के चउँक मा केक काटे के तइयारी मा जावत रिहिस। मोला लगत रिहिस कि दुवारी मा खड़े बराती ला बइठारे बर दरी माँगे बर जावत होही। भजिया खाये बर मोरे टपरी मा रबकगे। संजोग ले बधाई संदेश के फोटू वाले पन्ना उपर भजिया चटनी बाँधके दे डारेवँ। ओकर आत्मा ला अइसे ठेस लगिस जइसे कि किरिया खवाय पगला दिवाना प्रेमी ला छोड़के कोनो सुंदरी दूसर सँग बिहाव रचा डारिस। वोला यहू लगत रिहिस कि वोकर इष्ट देव के मूर्ति ला खंडित करत हें। वोकर दीनता ला देखके यहू लगिस कि तीन पुरखा के पुरखौती मकान मा बुलडोजर चलत हे। विरोध के दबे जुबान मा किहिस! आजे एकर जनम दिन हे अउ आजे एकर बारा हाल करत हावस भाई। मँय कहेँव! तोर नेताजी हमर बर हवा महल बनवात रथे, तँय ये कागज ला सकेल अउ कागजी महल बना। यहू समझाएवँ कि तोर किसमत अच्छा हे कि तँय वो नहीं तो वोकर फोटू सँग भजिया खावत हस माने वोकरे सँग खावत हस। जब ये मन साबर के नाम लेके सूजी धराथें तभो हम पाय मान लेथन ओइसने तहूँ मान ले। तोर इज्जत बाढ़ जाही। अखबार के का हे परब विशेष मा बिना भगवान देबी देवता के फोटू के तो अखबार नइ छपे। फेर मँय जे काम बर मँगाथौं वोला तो नइ छोड़वँ। फोटू सकेले बर पठेरा तो घलो होना चाही। जे काम के हे वोकर तो मुरती मड़ा देय हवँ। 

         जेकर तइयारी मा लगे हावस तोर आस्था कतका हे, सड़क बाजू के बिजली खंभा मा झूलत पोस्टर बतावत हे। बिचारा देव रूप गिराहिक चटनी सान के देश के अर्थ तंत्र ला चाँटे कस चाँट खाइस, अउ कागज ला  बाजू मा फेक दिस। भारतीय आम नागरिक जइसे आसा भरे नजर ले देखत कुकुर बइठे रिहिस। फेके कागज के चटनी पोताय माननीय जी के मुँहूँ ला चाँटके सफा करिस तब हमर दूनो के आत्मा ला शांति मिलिस।

         रायपुर से लेके दिल्ली तक के कोनों ना कोनों के जनम दिन, शहर आगमन अउ फीता काटे के खबर भर ले भरोसा नइ होवय कि सही मा आवत हे या जनम दिन हे कि नही। इँकर फोटू शहर गली सड़क के बिजली खंभा मा झूलत पोस्टर ले ही पक्का सबूत मिलथे कि हा ये सच हे। बिजली विभाग वाले मन के उदारता आय कि अइसन खबर ला बोहे बर खंभा सउँप देय हे। या कि खंभा हर इन मन ला गोद ले लेय हे। एकर यहू कारन हो सकथे कि रात मा घलो मनहूस करिया करतूत वाले के दरसन बल्ब अँजोर मा होवत रहय।

    पोस्टर टाँगे के नाम मा पेड़ लगाना स्थाई समाधान नोहे। महतारी के नाम मा पेड़ लगावत पोस्टर भर मा जागिस। बाप असन जंगल कटत हे वोकर दुख कोनो पोस्टराधिश मन ला नइये। जे मन विरोध के सँग दुख मनावत हें उँकर बर उजरे जंगल के फोटू टाँगे बर खंभा खाली नइ मिलत हे।अउ जे काम तंत्र के संरक्षण मा होवत हे तब जे महतारी के नाम पेड़ लगाए वोला का जवाब दिहीं। चउँक मा होर्डिंग के खूँटा हे तो ओकर ऊँचाई गिरौधपुरी के जैतखाम ले कम नइ रहय। जेकर ले चार कोस दुरिहा के अँधरा घलो देख जान लेवय कि आज---------।

           कोनो जनम के श्राप ला बोहे खंभा सोचत रथे कि कभू तो हमू ला हरू मिलतिस। फेर एक झन के उतरे के पारी आये नइ रहय दूसर के शहर आगमन के पोस्टर के तइयारी हो जथे। माने ये धरती के बोझ हें उँखर बोझा ला बारो महिना बोहे ला परथे। एको झन के श्रद्धांजलि के पोस्टर ले खुशी होतिस कि चलो अच्छा हे एकर तो आखरी होइस। जम्मो चिंता ले बाहिर भक्तराज मन खंभा के धन्यवाद मनाके जन्मोत्सव मनाये बर डीजे बजाहीं फटाका फोरहीं। जेकर ले परियावरण मा धमाकादार ममहाई तो बगरही । बस एक खंभा माननीय जी के पोस्टर के नाम आरक्षित रहना ही चाही। बिजली भले कटौती करके आय फेर खंभा पोस्टर के नाम हाथ खड़ा झन करे। खंभा हे तब पोस्टर हे अउ पोस्टर हे तब खंभा हे। 


राजकुमार चौधरी "रौना"

टेड़ेसरा राजनांदगांव।

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