Thursday, 15 January 2026

कलजुग केवल -------।"

 "कलजुग केवल -------।"

      लेड़गा पूछथे कलजुग केवल नाम अधारा।ऐकर काय मतलब होथे भईया।मे केहेंव रमायनिक मन बताथे रे लेड़गा पहिली परमात्मा ल पाय बर बड़ तपझप करे ल पड़े।तब कहूं ले देके प्रभु के दरसन होय। गंगा ल लाय बर भगीरथ के तीन पुरखा निकल गे तब ले देके गंगा हर धरती म आईस।फेर कलजुग ऐसन जुग आय जेमा सिरिफ भगवान के नाम ले ले से परमात्मा के दरसन हो सकत हे।या ये मानुष जनम ले मोक्ष मिल सकत हे।वहू म कहिथे एक घड़ी या दो घड़ी। कोनो जरूरी नइ हे माला धरके घंटों जपत रहा जब समे मिले जतना समे मिले परमात्मा के नाम लेना चाहि।लेड़गा कथे हव भईया तेखरे सेती सब अस्पताल, स्कूल,लेब मनके नाम देवी देवता के नाम म रखे रथे।

नही रे लेड़गा कलजुग के दूसर पक्ष (   )घलो हे।धरम अउ अधरम।अधरम के गोड़ हांथ नी राहय।वो हर धरम के गोड़ हांथ के भरोसा म रहिथे।जईसे रावण ल देख ले कतिक ज्ञानी, बलवान रिहिस तभो ले माता सीता के हरन करे बर साधू के भेष बनाय ल पड़गे ।जेन रावण हर कैलाश पर्वत ल हिलाय के दम रखे तेन हर का माता सीता ल अइसने नी ले जा सकतीस?

           वइसने कलजुग म जतना अधरम के काम हे धरम के नाम म होथे।जइसे अस्पताल, स्कूल के नाम ल देख ले, श्री राम,सांई, तुलसी, रामकृष्ण, गंगा, गायत्री, कृष्णा। भले कोनो मरे मनखे के लाश ल बिना पईसा के छुवन नी दिही।चाहे खेत खार बिक जाय।  दरियादिल।ददा लगे न भईया सबले बड़े रुपईया। वइसने स्कूल मन धंधा बनगेहे।जिहां ज्ञान बांटे नही बिकथे। ऐला लक्ष्मी के मंदिर घलो कही सकथन।लेड़गा कथे तोर कहे के मतलब हे भईया विद्या ददाति धनम।

         लेड़गा पूछथे ऐसने पूजनीय,दरसनीय जगा म घलो होवत होही न भईया?मे केहेव हव जी लेड़गा बड़े बड़े मंदिर मन में दरसन करे बर वीआईपी गेट, आनलाईन, आफलाईन,इही तो खेल आय। मंदिर म परसाद बेचना भभूती बेचना।अइसने राजनीति के भव सागर पार करे बर घलो धरम के डोंगा के जरुरत  होथे।

 हां कलजुग के एक ठन गुन खास हे चाहे धरमी राहय चाहे अधरमी अगरबत्ती जलाय बर नी छोंड़े।जईसे अंताक्षरी शुरू करे बर कहिथन शुरू करो अंताक्षरी लेके प्रभु का नाम।

           फकीर प्रसाद साहू 

               फक्कड़ 

                सुरगी

No comments:

Post a Comment