Monday, 5 January 2026

छितका तपई*

 *छितका तपई*

कार्तिक महीना के हिन्दू धरम म खास महत्तम हे । फेर  छत्तीसगढ़ म ये महीना धरम, आस्था अउ स्वास्थ्य के महीना होथे। कार्तिक लगथे तहाँ, इहाँ के लोगन मन बड़ मुंझुझुल ले कार्तिक नहाये बर जाथें । बड़ भिनसरहा उठना, बाहिर -बट्टा कर लेना अउ नदिया,नरवा, तरिया तक रेंगत जाना, शरीर के एक किसीम के कसरत हो जये जउन हा मनखे बर टॉनिक बरोबर फायदा मंद होथे । संगे-संग कार्तिक महीना ले ठंडा शुरू हो जथे भिनसरहा नहाये ले चार महीना के ठंडा  ल सहे के शरीर म क्षमता बाढ़ जथे जउन हा मनखे बर बरदान आय ।

कार्तिक महीना मा हिंदू धरम के सबला बड़े तिहार  देवारी अउ गोवर्धन तिहार मनाये जाथे। फेर पारी आये देवउठनी एकादशी .   पर्व के, जेकर बहुत अकन कहानी हे जेमा मुर राक्षस ल मारे खातिर एकादशी नामक देवी के उत्पति श्री विष्णु जी के शरीर ले होईस अउ वरदान प्राप्त करीस के जौन मनखे एकदशी  के उपवास रखही तेला विष्णु लोक के प्राप्ति होही ।

दूसरा कथा आथे जेमा आज के दिन दुर्वाशा ऋषि के श्राप ले राजा अंबरीश के रक्षा विष्णु जी करीन अउ आजे के  राजा  श्राप मुक्त होइन ।

 तीसर कथा श्री विष्णु जी आज के दिन  राक्षस राज जलंधर के पत्नी तुलसी .(वृन्दा ) संग  बिहाव करे रहिन येही  कारन आज तुलसी संग बिहाव करे जाथे ।

चौथा कारन  शंखासूर नाव के राक्षस संग  भगवान  विष्णु के महाभयंकर युद्ध होइस भगवान विष्णु लेह - देह म शंखासूर ल मारिस । युद्ध बहुत भयंकर रहिस भगवान विष्णु अतेक थकगे  के चार महीना क्षीर सागर मा जाके सोये ल परगे। देवउठनी एकादशी के दिन जागिस ।ये ही कारण आज के दिन से ही हर शुभ अउ नवा काज शुरू करे जाथे।

 

आज के दिन बड़ श्रद्धा के साथ लोगन एकादशी के उपवास रहिथे । छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान राज्य आय ते पाय के अँगना म धान, अउ कठई ( कुशियार ) ला सजा के खड़ा करे जाथे। रतिहा पूजा करके सात भाँवर घूम के लुये के  नेग  घलो करथें।

 रात 12 बजे के बाद छितकातापे के नेग करे जाथे जेमा बाँस के लकड़ी ले बने पुराना झउहाँ, चुरकी, टुकना, सूपा, बाँस के लकड़ी मन ल भूर्री बार के आगी तापे जाथे । बाँस के आगी कफ नाशक होथे। पुराना समय म निमोनिया वाले लइका ला बाँस के आगी मा सेकँय।रात के समय ठण्ड के बेर बाँस के लकड़ी के आगी के ताप अमृत के समान होथे एकरे सेती एकादशी के दिन खच्चित छितका तापना चाही ।

जुगेश कुमार बंजारे

9981882618

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