Monday, 5 January 2026

दिन बहुरगे (कहानी)

 दिन बहुरगे (कहानी)


           चौपाल म बइठे  फिरतू बबा के सोर लेवइया अब कोनो नई दिखय।  दिखही भी कहाँ ?  खेती- खार वाले मन बिहनिया ले निकल जाथे अउ आत ले साँझ हो जथे। थके मांदे लोगन घर म लगे डी डी डायरेक्ट देखत सुत जथे। बिहनिया उठिस तांहले फेर उही के उही बेरा। गाँव के किशोर लइका मन स्कूल ले आइस तहाँ  मोबाइल के इंस्ट्राग्राम,यू ट्यूब अउ वॉट्सएप म मगन हवय।  कोरोना काल म ऑनलाइन पढ़ई का होइस लइका मन के हाथ म मोबाइल आगे जइसे बेंदरा के हाथ मा उस्तुरा।  अब इन पढ़ई - लिखई  ल छोड़  जतका फालतू बुता हे सब मोबाईल म करत हवय। अब खेल म ककरो धियान नइ हे। गाँव के तीर मा महानदी के सुग्घर बोहावत धार म  तउरे बर ककरो करा समय नइ हे। फिरतू बबा तीन पीढ़ी के साक्षी हवय। एक समय रहिस कि आवत- जावत बबा ल कोनो बीड़ी दे दे, कोनो केवटिन मुर्रा चना त कोनो ढीमरा के बने ताजा जलेबी। गाँव भर मया करय बबा ला।


           समय के चक्का कहाँ रुकथे,घूमिस गाँव के दुर्भाग शुरू होगे। गाँव के बाहिर म दारु  लुका चोरी बेंचावय, पियईया मन उही डाहर ढरका के आवय। कम से गाँव के मरजाद बने रहिस फेर अब तो कोचिया मन गाँव भीतरी खुसर के बेचे ल धर ले हवय। अतेक सुघर गाँव ला नशा अपन चपेट म ले ले हवय।  फागू के पान ठेला गाँव भर म फेमस जिहाँ पान के बीड़ा के संग सुख- दुःख के गोठ होवय फेर अब उहाँ पान कम डिस्पोजल अउ पानी पाउच के बिक्री जादा होथे । साँझ होइस तहाँ मंदहा मन के बकर-बकर शुरू। अब तो साफ-सुथरा मनखे मन जाय ल घलो कतराथे । फिरतू बबा गाँव के अइसन हालत देख के हताश हे। 


         पहली चुनाव के बखत पाँच बछर म दारु के धार बोहावय फेर अब तो ये रोजिना के बात होगे, काबर राजनीति के मइलहा नाली अब गाँव के हर गली, हर घर, हर समाज अउ हर परिवार मा खुसरगे। नाली बज बजावत अउ बस्सावत हे। अइसे लगत हे मानो इहाँ के युवा मन के नस मा खून के जघा दारु  बहत हवय। कोचिया मन अवैध दारु बेंच के गाँव ला नशा मा बोर  दे हवय। 


         खेत बेच के नवा मोटर साइकिल ले रहिस मनोज हा। पइसा का आइस छानही म होरा भूंजे लगिस। पीना-खाना अउ जुआ-चीती। सियान मन कतको समझाइन फेर नइ चेतिस। एक दिन नशा मा धुत्त मोटरसाइकिल ला ऑय-बांय चलात  पेड़ म जा के झपागे। अइसे गिरिस के सीधा जमलोक पहुंचगे। मनोज दू लइका के बाप रहिस अब वोकर बाई उपर तो पहाड़ टूटगे। ना जाने कइसे करके पालही दू झन लइका ला। शीतला दाई के कोरा मा बसे अतेक सुग्घर गाँव ल जाने कोन भूतही के नजर लगगे। 

       

          ऑसों चुनाव म गाँव के युवा राजेश हा जीत के आय हवय। मन म कुछ नवा करे के जुनून हावय फेर दरुहा मन के इलाज पहली करे ल परही इही सोच के राजेश एक दिन पंचायत के बइठक बलाइस जेमा सबो सियान, पंच, युवा अउ खासकर महिला मन ला बलाइस। बइठका शुरु होय के पहिलीच कुछ पियक्कड़ मन फुसफुसाए लगिस - नेवरिया साधु के कुला म जटा  तोरो साध बुता जहय राजेश । सब सकलाय के बाद राजेश टी आई ला फोन करिस। गाँव वाले आपस म सोचें ल धर लिन कि पुलिस वाला ल काबर बलावत हे..? थोरिक देर में टी आई साहेब घलो आगे। सब झन खुसुर-फुसुर करे लागिस। 

           

           टी आई मनोज के दूर-दूर तक नाव रहिस काबर के उन अपराधी मन ल तरीका से सबक सिखाय , एक घाव कहूं कोनो अपराधी ला भीतरिया दिस त समझ जाव कि वोकर फैसला अदालतें म होतिस। कोनो नेता ल नइ घेपत रहिस येकर सेती 6 महिना ले जादा कोनो थाना म नई टिकत रहिस फेर ओकर परवाह मनोज कभू नइ करिस। अपराधी मन ओकर नाव सुन के थर-थर कांपय । अब बइठका शुरू होइस। 

           टी आई कहिस कि देखव भाई हो नशापान के रोकथाम अकेला प्रशासन ह नइ कर सकय येमा आम जनता के सहयोग जरुरी हवय। मैं आज ये गाँव म महिला कमांडो के गठन करत हँव। एक-एक टीम मा नौ-नौ झन महिला रइही। इन सबला आई कार्ड बना के  देहूँ। सब महिला बर एक डंडा अऊ सीटी के व्यवस्था पंचायत हा करही । ये सबो महिला मन पुलिस असन काम करही इँकर उपर कोनों भी प्रकार के बिपत्ती आही ता मोला तुरते खबर करहू। पुलिस के पूरा सहयोग इनला मिलही। पुलिस हा पूरा गाँव ल सहयोग करही ये बात के भरोसा मैं देवत हँव । जतका अवैध दारु के कोचिया हवय इन गाँव - गाँव ल बरबाद करत हवय इन ल ठिकाना लगाना जरुरी हवय । गाँव वाले मन ताली बजाके टी आई के गोठ के समर्थन करिन।


          फेर एक जरुरी बात जो मैं कहना चाहत हँव वो ये कि -  कोनो भी नशेड़ी ला जेल म बंद कर देना ये समस्या के हल नोहय। कुछ समय म उन छूट जाही अउ फेर पीये ल धर लेही। ये समस्या ल जड़ ले खतम करना हवय तब लोगन म जागरूकता लाना जरुरी हवय।  जब लोगन जागरूक हो जाही तब खुदे होके नशा करे ल छोड़ दीही। येकर उपाय सोचना तुँहर काम आय। अब ये तुँहर उपर हे कि लोगन ला कइसे जागरुक करना हवय। अतका कहिके टी आई चल दिस। 


            टीआई के जाय के बाद राजेश हा रामू कका ल कहथे -  आगे का करना हवय तेला  तुही मन बताव कका। रामू कका जेकर नाव गाँव के संग तीर तखार मा घलो पंचैत मा बड़ सम्मान से ले जाथे कहिन - देखव भाई हो गाँव के समस्या के हल गाँव म ही हो जाय येकर ले बने बात का होही.?  नशा के कारण कोनो भी भाई ल कोर्ट कचहरी अउ थाना के झंझट झन लागय, कुछ अइसन जुगत निकाले ला परही ताकि सांपो मर जाय अउ लाठी घलो झन टूटय।


            कुछ गुनान करे के बाद रामू कका कहिस - ये गाँव म जेन भी शराब के नशा करत या नशा के हालत म पाय जाही वोला डॉड़े जाही। अइसने जेन दारु बेंचत पाये जाही उनला घलो डॉड़ परही ,काबर पीनेवाला अउ बेचने वाला दूने दोषी हावय  येकर सेती दूनो ल पाँच पाँच हजार के डॉड़े परही। रामू कका के गोठ सुन के कुछ पंच मन बुदबुदाए लगिस। 


          रामू कका कहिथे का बात हे जी ? कोनो ल कोई आपत्ति हवय का? अतका सुन पंच मन चेपचेपागे। एक झिन पंच कहथे डॉड़ तो ठीक हवय कका फेर ये डॉड़ के पइसा पंचायत म रइही कि कोनो अपन खाता में जमा करही ?  तब सरपंच राजेश कहिथे -ये पैसा न तो पंचायत म रहय और न ककरो खाता म जमा होय ये पइसा हमर महिला कमांडो के जेन समूह इनला पकड़ही तेन समूह ला ये डॉड़ के राशि इनाम सरुप दे जाही। 


           रामू कका - तय तो मोर मुँह के बात ल कहिदे राजेश। सरपंच राजेश के गोठ सुनके महिला मन ताली बजाइन,उनला अइसे लागिस मानो पहिले बेर उँकर काम के सम्मान करे जात हे नइते नारी परानी ला का मिलथे केवल दुत्कार के सिवा ?


            अउ जेन डॉड़ के पइसा नइ दे पाही तेकर का होही  कका....?  एक झन पंच टांट मारत सवाल करिस। रामू कका कहिथे - वोकरो इलाज हावय जी। जेन डॉड़ के राशि नई दे पाही वोहा शीतला तरिया म १५ दिन तक रोजिना जाके पचरी के साफ-सफ़ाई करही। कचरा अउ दतवन के चीरी ल सकेलही। आखिरी दिन पंचायत मा किरिया ख़ाही कि अब दुबारा अइसन काम नइ करय। 


            फेर का उही दिन ले महिला कमांडो मन अपन बुता मा लगगे। का दिन अउ का रात  महिला कमांडो मन नौ-नौ के समूह बना के ओसरी पारी डिप्टी दे लागिन। हाथ मा डंडा, अउ एक सिटी संग मा किसान टार्च, रिकार्डिंग अउ फोटो खींचे बर मोबाइल ले लैस हो के चले लगिन। आज पहिली बार महिला मन ल अपन स्वतंत्रतता उपर गरब होत रहिस। चूल्हा चौका ले कभू नइ उबरइया महिला मन  आज कमांडो के भूमिका म हवय। साँझ के बाद घर ले बाहिर नइ निकलना मुश्किल रहय तेन आज रात बिकाल ले घूम घूम के डिप्टी बजात हे। 


           येती बर पियईया मन मा हाहाकार मातगे.. काबर कि महिला कमांडो मन घूमत रहय। पकड़इस मतलब पाँच हजार के डॉड़ मा उंकर आधा महिना के कमई चल देहय फेर बाकी महिना भर के गुजारा कइसे होही?  या फेर १५ दिन तरिया के सफाई जेन इज्जत के सवाल हे ।


            इही सोंच के कई झन पीयेच बर बंद करे लागिन। कभू कभार वाले मन तो छोड़िच दिन। फेर आदतन रोज पियईया मन तो हलकान रहय। महिला कमांडो मन पारी-पारी रात के ग्यारा के बजत ले डिप्टी बजात रहय। कमांडो मन के सीटी के आवाज सुनते साट पियइया मन के सिट्टी-पीट्टी गुम हो जाय। 


           एक दिन रात के सावित्री अपन महिला कमांडो संग मरघट्टी डहर निकलगे। रात के  ठउका 10 बजे रहय । मरघट्टी डहर ले खुसुर - फुसुर के आवाज सुन के सावित्री के टीम चौकन्ना होगे। महिला कमांडो के किसान टार्च के लाइट जइसने परिस भागो-भागो होगे । पियक्कड़ मन दारु- चखना ल उही मेर छोड़ सब पटाटोर होगे। कोनो हाथ तो नइ आइस फेर महिला कमांडो के दहशत पियइया मन उपर छागे रहय । 


            गाँव मा रात के 12 बजत ले  पुलिस के सीटी कस महिला कमांडो मन के सीटी परत रहय । अइसे तइसे 1 महिना होगे कोनो मेर ले नशाखोरी के खबर नइ मिलत रहिस अब गॉव भर के मनखे मन खुश हवय। गांव के गौठान, गली,मोहल्ला मा अवैध दारु बेचावत रहिस तेन बंद होगे। जगह-जगह दुरुहा मन पी खा के हुल्लड़ करय तेन बंद होगे । आय दिन लड़ई झगरा होय तेमा लगाम लगे लागिस। गांव के महिला मन सबले जादा खुश रहे लगिन काबर सबले जादा तकलीफ तो महिलाच मन ला होथे। सब डहर के मार महिलाच मन उपर परथे।  ऐती सरपंच के प्रशंसा गांव भर होये लागिस। गाँव ले बाहिर दूसर गाँव मा घलो सरपंच के काम के प्रशंसा सुनई दे लगिस। 


             साँझती के बेरा सुनीता के टीम ला खबर मिलथे कि दारु कोचिया अउ पियक्कड़ मन रात के आठ बजे असन कन्हार तरिया मा सकलाथे अउ पीथे काबर उहाँ रात के कोनो नइ जाय। सुनीता इमन ल पकड़े खातिर प्लान बनाय लगिस। उन अपन महिला कमांडो के संग 1 घंटा पहिलीच तरिया के खाल्हे मा सपट गिन। महिला कमांडो ले अनजान दरुहा मन तरिया डहर आइन अउ महफिल सजाये लगिन। बस फेर का हे सुनीता अपन टीम के संग दरुहा मन उपर टूट परिन। कमांडो ला देख के भागो- भागो मातगे। सुनीता कहिथे बिमला टार्च मार मैं इकर वीडियो बनात हव अउ बाकी मन इन ला घेरव भागे झन पाये। महिला कमांडो मन ले घेराय दरुहा मन पछिना-पछिना होगे रहय, कोनो येती भागत हे कोनो वोती फेर सुनीता के मोबाईल मा तो पूरा रिकार्ड होगे रहय। 


           दूसर दिन पचांयत बइठिस, दारु पियत अउ बेचत पकड़ाय जम्मो झिन ला डाँड़े  गिस। उँकर ले किरिया घलो लेवाय गिस के आज ले हमन न तो दारू पीयन अउ न तो बेचन। डाँड़ के पैसा ला सुनीता ल दे गिस। ये पइसा ला सुनीता अपन स्वसहायता समूह म लगा दिस ताकि समूह म पैसा के कमी झन रहय। 


           दारु कोचिया अउ पीने वाला मन म अतका भय समागे कि पीना अउ बेचना दूनों बंद होगे। फेर कहिथे ना चोर चोरी ले जाय हेरा-फेरी ले नइ जाय। कोचिया अउ दरुहा मन अब धोबिन तरिया ल अड्डा बनाय धर लिन। महिला कमांडो मन के नाक तो कुकुर कस रहय, सुंघियात उहों धमकगे। कुल मिलाके गाँव बाहिर पाँच सौ मीटर तक के दायरा मन चारो डहर नशा पानी पूरा बंद होगे। 

          

              सरपंच के शराबबंदी ले चिढ़े दारु के कोचिया मन अब कइसनो करके भंग करे के जुगाड बनाय लगिन । सरपंच के परिवार के कोनो सदस्य ल फंसा के बदनाम करे के साजिश रचे लगिन। 

              एक दिन सरपंच के सग कका के बेटा ल बहला फुसला के कोचिया मन कहिन देख रमेश तोर भाई सरपंच बने हे अउ तैं आज तक पार्टी घलो नइ दे हस का कंजूस आदमी हस यार...? 

            रमेश कहिथे- येहू कोई बात ये यार, तोला पार्टी चाही ना ले ले पार्टी, कहाँ करना हे बता ?  धोबिन तरिया म बइठबो अउ का।

             रात के आठ बजे सबो सकलाइन। रमेश डहर ले समोसा,भजिया, जलेबी, कोल्डड्रिंक आदि के पूरा इंतजाम रहय वोतके बेर कोचिया मन दारु के अद्धि अउ पव्वा धर के पहुंचगे। रमेश भड़कगे - ये तो बने बात नइ हे यार जब तुमन जानत हव कि गाँव मा शराब बंदी हावय तब तुमन दारु धर के काबर आय हव..? 

            कोचिया कहिथे - अरे जान दे ना रमेश एकाध पैक मार लेबों त काय फरक पर जाही। वइसे भी ये मेर कोनो देखइया नइहे। अउ फेर तोर भाई सरपंच हावय  तोला का के डर। तोर कोन का बिगाड़ लेही..?

          रमेश कहिथे - ये अच्छा बात नोहय। फेर कोचिया मन तो पूरा प्लान म रहय। जोर जबरजस्ती कर के रमेश ल घलो पियाच दिन। अब वो मेर सबो झन दारु अउ चखना मा रमगे। पार्टी के खबर तो महिला कमांडो ल लगगे रहय। चलत पार्टी म महिला कमांडो धमकगे। फेर का पूछना सब कोनो दारु चखना ल छोड़-छाड़ के कूद-काद के येती ओती भागे लगिन। ककरो माड़ी छोलावत हे त ककरो हाथ। सावित्री के टीम हा रमेश संग दू झन ल पकड़ लिस। 


           रमेश तैं...? येती तोर भाई नशाबंदी के सुग्घर काम करत हावय अउ तैं नशापान करत हस तोला कुछु लागथे कि नहीं ..? सावित्री कहिस। 

         रमेश गिड़गिड़ाए लागिस मोला छोड़ दे भउजी मैं ये कोचिया मन के भभकनी म आगेंव फेर कभू दारु ल हाथ नइ लगांव। 

          सावित्री कहिस- देख रमेश पूरा टीम हा तोला नशा मा देख डारे हे। अब तो येकर फैसला पंचायते मा हाेही.. 


              दूसर दिन साँझ के पंचायत मा बइठका होइस। आज पंचायत मा भारी भीड़ रहय काबर के सरपंच के भाई के फैसला होना रहय। येती बर कानाफूसी होय लगिस कि सही फैसला होही कि नहीं। कोनो कहत हे कहां ले होही देखबे सरपंच अपन भाईच डहर बोलही वोला डाँड़ बोड़ी नइ परय। लेना आज येकर परीक्षा हवय येहा सही म शराबबंदी चाहत होही तब डाँड़ही नइते नई डाँड़य


              येती कोचिया अउ वोला संग देने वाला मन भीतरे भीतर मगन होत रहय कि आज ले शराबबंदी के भूत सरपंच के मुड़ी ले उतर जही अउ काली ले फेर दारु के धंधा फ़ुन्नाय लगही। रामू कका अपन ठीहा मा बइठिस अउ कहिस - देख रमेश आज जेन तोर शिकायत आय हे वो अक्षम्य हे। न्याय तो सब बर एक हवय। चाहे गाँव के कोनो मनखे होय। तोला डाँड़ तो परबे करही। अउ ते किरिया खा कि आज के बाद तैं अइसन काम नइ करस।


           रामू कका कहिथे - कइसे राजेश तोला फइसला म कोनो आपत्ति हे का ...?  सरपंच कहिस - तै कभू गलत फइसला कर ही नइ सकस कका। जेन पंचायत के नियम हे वो सब बर लागू होही। चाहे मोर सग भाई ही काबर न हो पंचायत के फइसला सब ला माने परही। 


         राजेश के जवाब सुन के पंचायत म बइथे सब झन राजेश के प्रशंसा करे लगिन कि सरपंच होय त अइसने नियाव रास्ता म रेंगने वाला। सरपंच के भाई वोकर साथी अउ कोचिया मन ल पांच-पाँच हजार के डॉड़ परिस अउ फेर कभू अइसन काम नइ करन कहिके किरिया खाइन। 


          अब तो तीर तख़ार के संग दूरिहा के गाँव म घलो सरपंच के प्रशंसा फैले लागिस। आने गाँव के मन घलो अब अपन गाँव म शराबबंदी के योजना बनाय लागिन अउ राजेश ला बलाय लगिन। सरपंच आन गाँव म जाके महिला कमांडो के गठन करे ल धर लिस । 


        शराबबंदी होय आज 11 महिना बीतगे हवय गाँव शराब मुक्त होगे हवय। सब डहर सुख शांति हवय। राजेश अपन किसानी मा मगन हे तभे मोबाइल म काल आथे - हैलो राजेश जी बोल रहे है ?

         राजेश- हव राजेश बोलत हँव। 


         मैं जिला मुख्यालय से एस.पी.नरेश मिश्रा बोल रहा हूं। आपने गांव में शराबबंदी करके  बहुत बड़ा मिशाल कायम किया है । पुलिस प्रशासन आपका सम्मान करना चाहती है? 


           राजेश - ये शराब बंदी मा मोर अकेला के योगदान नइहे सर, येमा मोर गाँव के दीदी, बहिनी, बेटी अउ बहू मन के महिला कमांडो के योगदान अउ मेहनत हावय। तब येकर आधा हकदार तो उहू मन हे। यदि आप सम्मान करना चाहत हव तो पूरा टीम के करव नहीं त मोला क्षमा करहू। 


            एस पी मिश्रा जी कहिन - हमें आप पर गर्व है राजेश जी कि आपने अपनी पूरी टीम को इसका श्रेय दिया है। फिक्र मत करिए आपका सम्मान  आपकी पूरी महिला कमांडो के साथ किया जायेगा।


           एक बड़े कार्यक्रम मा राजेश अउ महिला कमांडो मन के सम्मान होइस। आज गाँव के सबो झन खुश हे कि हमर गाँव नशामुक्त होगे हे। सब ले जादा खुश तो फिरतू बबा हवय कि वो कर जुन्ना दिन बहुरगे..। 



अजय अमृतांशु,भाटापारा

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