छतीसगढ़ के गौरव गाथा अमर राहय
एक नवंबर हमर छत्तीसगढ़िया मन बर गरब अउ गौरव के दिन आय, ये दिन छतीसगढ़ के नाव इतिहास मा सुनहरा
अक्षर ले अंकित हवय I काबर इही दिन अपन नवा स्वरूप मा सबके दुलौरिन सबके मयारू हमर छतीसगढ़ महतारी
सन 2000 मा मध्यप्रदेश ले अलग होके भारत के 26 वां राज्य बनिस I अउ ओकर राजधानी रायपुर ह बनिस, ओकर
सेती ये दिन हम सब बर आत्मसम्मान,गौरव अउ विकास के नवा शुरुवात के नवा रद्दा बनिस I
संस्कृति,संस्कार,सभ्यता ला हार मा पिरोवत आज हमन छतीसगढ़ राज बने के खुशी मा रजत जयंती मनावत हन I
देखत हन नवा सपना
घर बन होही उजियारा
डगर डगर मा गूँजही
जय हो जय छत्तीसगढ़ के नारा
सिरतोन मा इहाँ के लोक संस्कृति, सभ्यता,गीत संगीत,लोक नृत्य,सरल सहज गुरतुर बोली लोगन के हिय मा रच बस
जाथे I हरियर हरियर धरती धानी,बन जंगल पहाड़,कलकल करत नदिया नरवा झरना,डीह डोंगरी पठार प्रकृति के
अद्धभुत सुंघरई ल अपन अचरा मा समेटे अकुत खनिज संपदा ला अपन गर्भ मा धारण करे हे I तेकर सेती हमर
छतीसगढ़ महतारी ल रत्नगर्भा तको कहिथे, तभो ले विकास के रद्दा मा हमर महतारी कोसों दुरिहा पिछवागे रिहिस , जेकर पीरा
कई घव हमन अनुभव करे हनI अइसे लगय हमर राज के भूगोल म कोन्हों अस्तित्व नइये, फेर प्रदेश के सुजानिक लइका मन
महतारी के पीरा ला समझिन अउ आवाज उठाय बर धरिन I ठाकुर प्यारेलाल सिंह, डाक्टर खूबचंद बघेल, पंडित
सुन्दरलाल शर्मा, डाक्टर चंदूलाल चन्द्राकर अउ कई झन जागरूक सियान मन अंतस के आरो ल उपर केंद्र तक
पहुचाइन I अउ एक दिन,,, वो बेरा आइस जेन दिन छतीसगढ़ महतारी के गोहार ल राष्ट्र के शासक मन ल सुनाय गिन
अउ तय होइस वो तारिख एक नवंबर 2000 जब हमर छतीसगढ़ महतारी अपन अलग राज के रूप मा आकार लिन I
तब जम्मों छत्तीसगढ़िया मन के चेहरा खुशी ले खिलगे,,,, आत्मसम्मान अउ आत्मगौरव के मुकुट सजगे सबो मनखे के
मुँह ले निकलिस
जय हो,, जय हो,, छतीसगढ़ मइया, मध्यप्रदेश ले अलग होके प्राकृतिक संपदा अउ धन धान्य ले भरे
नवा छत्तीसगढ़ राज के भौगोलिक स्थिति के बात करथन तब येकर लंबाई उत्तर ले दक्षिण ७०० किलोमीटर,पूर्व ले
पश्चिम ४३५ किलोमीटर हावय I छत्तीसगढ़ राज के सीमा सात ठन राज्य ले घेराय हे, उत्तर मा उत्तरप्रदेश, उत्तर पूर्व
मा झारखंड,दक्षिण पूर्व मा उड़ीसा, उत्तर पश्चिम मा मध्यप्रदेश, पश्चिम मा महाराष्ट्र, दक्षिण मा आन्ध्रप्रदेश अउ
तेलंगाना हे I येकर सुंघरई के का कहँव मैकल पहाड़,रामगिरी,बैलाडीला,
लाफागढ़,देवगढ़,अबुझमाड़,कुल्झारी,सिहावा,मैनपाट अउ बस्तर के पठार ला मुड़ मा बोहे मुसकावत हे I
महानदी,शिवनाथ,अरपा,पैरी,खारून,जोक,मनियारी,हसदेव,इन्द्रावती,लीलागर,रेणुका,मांड, ईब, केलो,डंकिनी
शंखिनी,बाघ ,सोंढुर,दूध नदी के जलधार पग मा पाँव पखारत हे I सबके भरण पोषण सिंचित करत इहाँ के माटी बड़
उपजाऊ तभे तो धान के कटोरा के ताज मुड़ म सजे हे I गंगरेल, माडमसिल्ली, तांदुला,बांगो,खरखरा, दुधावा बाँध
महतारी के प्यास बुझावत हे I खनिज संपदा के बात करथन त कोयला,हीरा,सोना,बाक्सइट.लौह
अयस्क,डोलोमाइट,चूनापत्थर,टिन अयस्क,अभ्रक प्रचुर मात्रा मा मिलथे I रायपुर जिला के देवभोग मा हीरा के भंडार
खोजे गे हे, अउ सफलता पूर्वक उत्खनन करे जात हे I दल्ली राजहरा के बाद लौह अयस्क के विशाल भंडार रावघाट
मा मिले , जिहां उत्खनन के काम चलत हे अतेक खनिज संपदा होय के बाद छत्तीसगढ़ ह पिछवाय रिहिस हे,फेर राज
बने के बाद येकर दशा अउ दिशा मा बदलाव आइस I
छत्तीसगढ़ के पावन भुइयाँ के कोंनहा कोंनहा मा श्रध्दा भक्ति के धार बोहावत हे,चारों मुड़ा देवी माँ विराजे हे जिहाँ
जन-जन के आस्था के दीया जलत हे I डोंगरगढ़ के बमलेश्वरी माई,राजिम जेला छत्तीसगढ़ के तीर्थ प्रयाग जिहाँ
भगवान राजीवलोचन विराजे हे महानदी पैरी सोंढुर के संगम जिहां हर साल पुन्नी मेला लगथे अउ महीनो तक चलथे
I जेला आज कुंभ मेला तको कहिथे, संत गुरुघासीदास के जन्मस्थली गिरौदपुरी,शिवरीनारायण के त्रिवेणी
संगम,रतनपुर के महामाया,सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर,भोरमदेव,तुरतुरिया,सोमनाथ,खरौद के लखेश्वर महादेव,दंतेवाड़ा
के दंतेश्वरी माई,नगरगाँव के बोहरही दाई,बंजारी माई,गंगरेल तीर अंगार मोती कई ठन मंदिर छतीसगढ़ के
धार्मिक,एतिहासिक अउ सांस्कृतिक पहचान हवय जेन हा आस्था के संगे संग कला अउ इतिहास के गौरव गाथा के
उदाहरण हरे I
गिरौदपुरी,शिवरीनारायण,सिरपुर, तुरतुरिया, मल्हार,खरौद,खल्लारी
दंतेश्वरी,बमलाई,चंद्रहासिनी,महामाई,बोहरही दाई के महिमा भारी
छत्तीसगढ़ के नामकरण ल देखथन त कई ठन प्रमाण मिलथे, बाल्मिकी रामायण मा दंडकारन्य अउ दक्षिण कोशल के
रूप मा उल्लेख I राज्य के उत्तरी भाग उत्तरप्रदेश के अवध अउ दक्षिण कोशल राज के दक्षिण भाग ल कोशल राज कहें
जाथे, राजा दशरथ के रानी कौशिल्या देवी दक्षिण कोशल के राजकुमारी रिहिन,कालीदास के रघुवंश मा घलो कोशल
के वर्णन मिलथे I इतिहासकार राय बहादुर हीरा लाल के अनुसार छतीसगढ़ के नाँव पहिली चेदि वंश के शासन के
सेती चेदिसगढ़ कहावय I बाद मा ओकर अपभ्रंश अउ छत्तीस किला या गढ़ होय के सेती छत्तीसगढ़ होगे, रायपुर
जिला के गजेटियर के अनुसार कलचुरी शासन काल मा शिवनाथ नदी के दक्षिण भाग मा 18 जिला अउ शिवनाथ
नदी के उत्तरी भाग माने रतनपुर राज मा 18 जिला रिहिस आज भी
हम पुरातत्विक एश्वर्य ल कई रूप मा देखथन I कहूँ जीर्ण रूप कहूँ शिलालेख,मूर्तिचित्र अउ कई प्रकार के उत्खनन शोध
के रूप मा ।
राज बने के बाद सरकार पुरातत्व अउ संस्कृति विभाग ल मजबूत बनइस, अउ पुरखा मन ले मिले
धरोहर मंदिर,किला के मरम्मत साफ़ सफाई रंग रोगन कर पर्यटन सुविधा ल बढ़ावा देवत हे I
इहाँ के लोकगीत लोकनृत्य हर तीज तिहार मा खुशी के रंग भर देथे, ढोल मादर के थाप उछाह ल दुगुना कर देथे I
सुआ. करमा, ददरिया.पंथी,पंडवानी,भरथरी, राउत नाचा,डंडा राष्ट्रीय अंतरास्ट्रीय स्तर मा पहुँच गे हवय,राज बने के
बाद लोककला के संरक्षण बर संस्कृति विभाग बढ़वार मा जुटे हे I येला शैक्षणिक पाठ्यक्रम मा तको शामिल करे गे हवय
तेकर सेती तो ये लोक संगीत अउ नृत्य हा हमर मन के आत्मा मा रचे बसे हे I अउ उही कारण लोक संगीत
लोक गीत,लोक नृत्य ल छत्तीसगढ़िया मन के आत्मा कहे जाथे।
छतीसगढ़ के लोकजीवन खेती किसानी प्रकृति अउ देवता के पूजा पाठ संग अंतस के गहिर ले जुड़े हे तिहार बार मा
प्रकृति के सम्मान बर अउ देवता ल आभार करत उछाह उमंग सन गाँव समाज के मनखे के मेल मिलाप अपनापन अउ
एकजुटता के भाव ल दिखाथे I
महर महर महका के संगी, राज के मान बढ़ाबो
देश दुनिया मा जश बगरे, सपना पुरखा के सिरजाबो।
छतीसगढ़ राज बने के बाद इहाँ शिक्षा के विस्तार मा बड़ तेजी आइस शिक्षा अउ स्वास्थ्य के विकास ल कोनों भी राज
के रीड़ के हड्डी माने जाथे I जब राज बनिस तब बीमारु राज के रूप मा एकर गिनती होत रिहिस हे, फेर आज 25
बरस के यात्रा मा अतका विकास करत हे अब बीमारु नहीं विकसित राज के रूप मा पहचान बनगे I आज जब हम
शिक्षा कोती ल देखथन त मेडिकल कालेज,इंजीनियरिग कालेज,आई आई टी,एम्स,फार्मेसी,नर्सिग,ला कालेज हे I पढ़ाई
के क्षेत्र मा परचम लहरात हे I अउ स्वास्थ्य कोती ल देखन त पूरा राज्य मा स्वास्थ्य के पहिया चरमराय कस लागय,
फेर आज विश्व स्तरीय अस्पताल सुविधा ले भरे मिलत हे, रायपुर मा एम्स, मेकाहारा अउ जगह जगह के जिला
अस्पताल लोगन बर जीवन रेखा के रूप मा काम करत हे I
नवा बिहान हमर नवा पहचान सही मा 1 नवंबर 2000 सिर्फ राज के जनभावना के जीत नोहय, बल्कि सब बर नवा
उजास नवा अवसर लेके आय हे I आधी आबादी महिला मन के हावय फेर पहिली राजनीति मा पुरूष मन के दबदबा
राहय, महिला मन के भागेदारी नहीं के बराबर राहय फेर आज महिला मन कंधा ले कंधा मिला के राजनीति मा तको आगे आवत हे,
पंचायत मा महिला आरक्षण के आय ले महिला मन ल मौका मिलिस I अउ पंच सरपंच ले के जनपद,जिला,विधान
परिषद मा आके अपन जिम्मेवारी,भागेदारी निभावत हे महिला संगठन,स्व सहायता समूह अइसे कोनों क्षेत्र नइये जेमे
महिला मन नइ होही I सरकार तको महिला मन ला आगू बढ़ाय बर कई ठन योजना चलावत हे, महिला
सशक्तिकरण,महिला कोष,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जइसन योजना ला ओकर मन के आत्मविश्वास अउ आत्मनिर्भर
बनाय बर चलावत हे I राजनीति मा महिला मन के भागेदारी नवा सोच नवा दिशा नवा समाज के कहानी गढ़त हे,
कहिथे न कोनों भी राज के विकास तब होथे जब महिला मन के भागेदारी होथे I
लड़बो अपन संस्कृति भाखा बोली के बढ़वार बर
नवा बिहान नवा सुराज छत्तीसगढ़िया मन के अधिकार बर।
छतीसगढ़ी हमर महतारी भाखा आय तइहाँ समे के गोठ करन तभो इहाँ कथा कन्थिली,गीत लोक जीवन मा रचे बसे
रिहिस I इहाँ के लोगन मन जादा पढ़े लिखे नइ रिहिन तभो अपन साहित्य गाथा गीत ला एक पीढ़ी ले दूसर पीढ़ी तक
सहेजे के बूता करत रिहिस I फेर नवा राज बने ले साहित्य ल मानों नवजीवन, राज्य सरकार छतीसगढ़ी ल राजभाषा
के दर्जा देके हमर भाखा के बढ़वार बर उदिम करिस I छतीसगढ़ी साहित्य के कोठी ल भरे के उदिम होवत हे,
समाचार पत्र पत्रिका कवि मंच,गोष्ठी अउ कई माध्यम ले छतीसगढ़ी साहित्य ल बढ़ावा मिलत हे I अउ इहाँ के
साहित्यकार मन छतीसगढ़ी भाखा ल पोठ करे के उदिम मा दिन रात लगे हें, अइसे लागे ले धर ले हे माटी मा लुकाय
अउ नँदाय गीत मन फेर पीका फूटत हे,
नवा पीढ़ी के साहित्यकार मन नव कविता गीत के संगे संग सामजिक
मुद्दा,समसामयिक विषय मा लेख अउ छंद मा रचना करत हें I
विकास के गति सरलग चलने वाला हरे, अउ ये विकास के गाथा गढ़े बर हम ला अउ जादा ले जादा उदिम करे ले
लगही I एखर बर सद्भाव अउ भाईचारा ले कदम ले कदम मिला के संकल्प लेके जुरमिल के चले ले पड़ही I शिक्षा
कला,संस्कृति ल ऊँच अगास मा पहुँचाय ले पड़ही अपन भाखा बोली परंपरा के बढ़वार करत अवइया पीढ़ी ल राज्य
स्थापना दिवस के महत्व अउ गौरव गाथा ल बताय ले पढ़ही I छत्तीसगढ़ महतारी के अचरा मा सुखदा के धार
बोहावय, विकास अउ समृद्धि के गाथा गढ़य छत्तीसगढ़ महतारी के गौरव अमर राहय I
सुमता के रद्दा मा चलबो हम सब इहाँ के निवासी
जाँगर पेर कमाबो जुरमिल खाके चटनी बासी
दुराचारी हा डर के भागय तानन अइसे छाती
हीत मीत ल देते राहन संगी मया दया के पाती।
संगीता वर्मा
भिलाई अवधपुरी
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