राज्य अलंकरण
कोनो भी राज/राज्य के निर्माण वो राज के लोगन के भावना अउ माॅंग ल लेके करे जाथे। जेन ल जनभावना कहे जाथे। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण आसानी ले नइ होय हे। छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नद्रष्टा अउ एकर बर संघर्ष करइयाॅं पुरखा मन के माॅंग अउ संघर्ष सालों साल पाछू, बछर २००० मं रंग लाइस। एकर पाछू के कहानी आप सब बुधियार मन मोर ले जादा विस्तार ले बता सकत हौ। कुछ झन मन ए यात्रा के खुदे साक्षी हौ। खुद संघर्ष मं कदम ले कदम मिला के चले हौ। आपके संघर्ष अउ धैर्य ल सादर नमन हे।
छत्तीसगढ़ राज्य अपन निर्माण के रजत जयंती वर्ष के समारोह भव्यता ले मनाइस। राज्य निर्माण के वार्षिक समारोह कोनो भी राज्य के जनता बर बड़का अवसर होथे। ए बेरा मं जनता ल कुछु आशा बॅंधे रहिथे। शासन जनहित मं कुछु नवा काज के घोषणा करही। विभिन्न क्षेत्र मं उल्लेखनीय कारज करइया प्रतिभा मन ल ए अवसर मं राजकीय अलंकरण ले अलंकृत करे जाथे। सम्मान दिए जाथे।
राजकीय अलंकरण कोनो भी क्षेत्र मं दिए जाय। वो अलंकरण बड़का सम्मान होथे। कोनो भी क्षेत्र विशेष मं विशेष योगदान अउ उपयोगिता के कसौटी मं कसे के पाछू च अलंकरण बर चिन्हित करे जाथे। चाहे वो योगदान राज्य के लोक संस्कृति, लोक परम्परा अउ लोक कला के बढ़वार बर होय, चाहे जन हित मं उपयोगिता अउ समाज उत्थान के कारज खातिर होवय।
अइसे तो अनेक क्षेत्र मं कारज करइया लोगन बर असली अलंकरण अउ सम्मान वो क्षेत्र ले जुरे मनखे के सराहना अउ प्रशस्ति हर आय। जनता डहर ले मिले सम्मान जब राज्य डहर ले अनुमोदित होथे, त राजकीय अलंकरण ले अलंकृत प्रतिभा मन नवा पीढ़ी बर प्रेरणा पुंज बनथें।
कोनो भी क्षेत्र के बात हो, उहाॅं कतकोन नामचीन अउ लोक प्रिय प्रतिभा होथें। सबके अपन-अपन ढंग होथे। अइसन म सब ले योग्य ल चुनना आसान नइ होवय। लोक म रचे-बसे कतको प्रतिभा अपने मं मस्त रहिथें। कतेक मन तिल के ताड़ बरोबर लिखरी-लिखरी बात ल बढ़ा के प्रचार-प्रसार करथें। कुछ मन विज्ञप्ति निकले पाछू फारम नइ भरॅंय। कुछ तो यहू सोचथे कि सम्मान करे के आय। ओकर बर फार्म भरे के जरूरत नइ होना चाही। अइसन मं कुछ प्रतिभाशाली श्रेष्ठ के चयन सम्मान बर नइ हो पावय। सम्मान के घोषणा पाछू तुलना करे ले, निराशा हाथ लगथे। चयन समिति ऊपर अंगरी उठथे। चयन समिति या जूरी मेंबर कटघरा मं घेरा जथे। कोन फार्म भरे हे अउ कोन नहीं? एकर पता तो जूरी ले बाहिर मनखे ल होय नइ। अइसन मं उन अंगरी उठा सकथें।
समाज मं होय ते अउ कहूॅं, आज दिए जावत सम्मान के सम्मान घट गे हे। कई बार तो अइसे लगथे कि सम्मान रेवड़ी सहीं बाॅंटे जावत हे। इही बात राजकीय सम्मान बर सवाल खड़े होय मं कहे जा सकत हे। घोषणा पाछू कुछ सम्मान ऊपर बहस छिड़ जथे। चाहे ए बहस कोनो ठउर मं हो? ए अलग बात आय कि एहर साॅंप के जाये ले लकीर म लाठी पिटई साबित होथे। एक कहावत हे कि धुॅंगिया उहें ले उठथे, जिहाॅं आगी रहिथे। ए धुॅंगिया उठे के वजह हे, राजनीति के घुसपैठ। सबे मनखे राजनीति के चश्मा पहिने नजर आथे। आम आदमी के छोटे-छोटे काम पेंडिंग मं रहिथे। गॉड फादर बिगन काम नइ होवय। राजनीति घर-घर मं हमागे हे।
लोक ल हीरा के पहिचान होथे। उन ल कभू नइ लगना चाही कि सम्मान सही आदमी ल नइ दिए जावत हे। कोनो भी योग्य ल छोड़ आने ल सम्मान मिले ले, सवाल जरूर खड़ा होथे। संबंधित प्रतिभा के लोक मं लोकप्रियता के बारे मं प्रस्तुत साक्ष्य के अलावा जानबा सकेले के उदिम होना चाही। कम से कम संबंधित के जिला या जनपद क्षेत्र ले।
सम्मान के सम्मान होवय यहू बात के विचार करे जाय। सम्मान पाने वाला ल भी लगना चाही कि ए सम्मान सिरीफ मोर सम्मान नोहय, मोर कारज मं मान देवइया लोक के सम्मान आय। जूरी मेंबर रही चुके मनखे ल सम्मान ले ऊपर माने जाना चाही। जूरी मेंबर उही ल बनाय जाय, जेन ल कभू वो सम्मान बर चुने नइ जाना हे। या फेर उन ल, जेन सम्मानित हो चुके रहय। अइसन करे ले सम्मान के सम्मान बने रही पाही। एकर नैतिक जिम्मेवारी सम्मान देवइया संस्था/संगठन के होना चाही।
(चयन नीति अउ जूरी के चयन सीमा अउ मापदंड का हे? एकर जानकारी मोला नइ हे।)
पोखन लाल जायसवाल
No comments:
Post a Comment