Thursday, 15 January 2026

चंदा

 चंदा


चंदा के नाम सुनके मन म हिलोर मारथे। अऊ मनके भार्री भांठा ह लहलहा उठथे । ऐकर उलटा कोनो ल चंदवा कही देबे त भांठा के पेरावठ म आगी जरे कस लागथे। काबर की चंदवा मन के मुड़ी अधियारी पाख के तीज, चऊत के चांद कस दिखथे।


चंदा के नाम सुनबे तेमे अइसे लागये मानो पूरा सर्व गुण सम्पन्न होही। फेर ओकर  असलियत तो पाख के एम्कम, दूज तीज के पता चलथे ।चंदा ल कहिबे त सिरिफ अऊ सिरिक अंधियारी पाख के पून्नी के चंदा ह  दगदग ले लागथे। कतनो मनखे मन पून्नीपूनवास बर मेला मड़ई म नहाखोर के पूजा-पाठ दानपून घलो करथे। 


ये बात धलो सिरतोन आय चंदा हर सबो मनखे ल नई मिले। सकल सुरत सुभाव ल देख के मिलथे ।एक ठन चंदा दानपुन वाले घलो होथे।कोनो समाजिक, सामुहिक काम, कारज बर चंदा लागबे करथे ।चंदा मंगई धूलो अड़बड़ हिम्मत के काम आय। ये कोनो जंग (लड्ई) लड़े ले कम नोहे। चंदा मांगे बर बहुत बड़े करेजा चाही। जइसे माइनस डिगरी म देश के रक्षा करना ।चंदा देवईया मन घलो दुश्मन ले कम नी राहय । भले चंदा दस, बीस रुपया ल दीही फेर सुनाही अतिक ठाढ़े-ठाड़ सुखा जबे । अइसे लागथे दुबारा ओकर डेरोठी म गोड़ ती राखतेव ।अऊ मुख नी देखतेंव।अऊ अइसने मन डिमांड ल घलो बड़े बड़े नाचाकूदा के करथे।अऊ कहीं भणडारा होगे त अइसन मनके घर के चूल्हा ह उपवास घलो रहिथे।

चंदा के असली मजा ल राजनीतिक पारटी वाले मन उठाथे।मानो आरबीआई हर नोट छापे के ठेका इही मन दे देहे। चुनावी चंदा मतलब हरहा गोल्लर।जिनगी के संग जिनगी के बाद।सब चीज म छुट।ते हर कोनो ईनाम जीत जबे तेमे टैक्स,फेर ऐमन टैक्स फीरी रहिथे।इंखरो सोंचना ठीक हे। जनता ल सब फीरी दे सकथे त एकात ठन फीरी यहू मन ल मिलना चाही।हमन दस बीस चंदा बर तरसथन ऐमन ल करोड़ों मिल जथे।इही सकल सुरत के कमाल आय।विमल दाना दाना म केसर के सुवाद?


         कतनो मनखे मन के काम चंदा म चलथे। कतनो मनखे मन चंदा के पईसा ल पूड़ी ल चपका म चमकथे तईसे चपक ( दबा) दबा देथे। भले देवी देवता के राहय चाहे धारमिक काम कारज के।ददा लगे न भईया सबले बड़े रुपईया।

        कहां राजा भोज अऊ कहां गंगू तेली।एक झन बुधियार साहित्यकार हर सोसल मिडिया म लिखे राहय साहित्यिक कार्यक्रम बर चंदा ज़ोन ज़ोन मन देना चाहत हे नगद नही ते फोन पे कर सकत हे।ये हर उंखर बर गरिबी म आंटा गीला कस आय।चाहे गोष्ठी म जाय बर होय चाहे कराय बर। ये बुद्धिजीवी मन ल न थूंकत बने न लिलत। भले घर के सुवारी लईका मन झंझेट राहय।बिचारा मन बड़ दिलवाला रहिथे।मंच म स्वांत:सुखाय बोलेबर नी छोड़े।

     कहिथे जब -जब देश के राजनीति लड़खड़ाथे तब तब साहित्यकार ह उठाथे।फेर साहित्यकार -------------।

हाय मोर चंदा?

         

 *फकीर प्रसाद साहू* 

       *फक्कड़*

          सुरगी 🙏

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