*. गोदाम के धान ला मुसुवा खा दीस!*
(छत्तीसगढ़ी लघुकथा)
- डाॅ विनोद कुमार वर्मा
एक ठिन सोसाइटी के गोदाम 06 महीना ले ताला बन्द रहिस। जब ओला खोलिन त एक करोड़ के धान शार्टेज मिलिस। गाँव अउ विभाग मा हलचल मच गे। जतकी मुहूँ ओतकी बात!
अफसर मन जाँच अधिकारी ला बताइन कि एक करोड़ के धान मुसुवा खा दीस! .....गाँव वाला के संगे-संग जाँच अधिकारी घलो सोसाइटी के अफसन मन के तर्क ले संतुष्ठ दिखिन। सचमुच वो गाँव मा बहुत मुसुवा रहिस त गोदाम के एक करोड़ के धान ला 06 महीना मा खा ही सकत हें!
तभे जाँच अधिकारी ले एक तीसरी कक्षा मा पढ़इया नानकुन लइका प्रश्न करिस- ' सर, धान ला तो मुसुवा खा दीस फेर ओकर फोकला ला कोन खाइस? मुसुवा मन तो फोकला ला नि खावँय! '
जाँच अधिकारी के मुहूँ ले निकलिस- ' वाह बेटा! ..... शाबास!! .... एकदम सही पकड़े हस!!! '
एकर बाद जाँच के दिशा ह बदल गे!
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