*जोड़ के दरद*.
ब्यंग (टेचरही)
अउ कका का हाल चाल हे जी? बस ये अइसन पूर्व संपादित सवाल आय , जेला दिखावटी मया के स्प्रे मा घोर के छिँच दे जवाब के सूचि जारी होही वो निर्दली प्रत्याशी के घोषणा पत्र ले कम नइ रहय। 75 साल तरक्की के आवाजाही ले अतका गड्ढा मिलिस कि हपटे कूदे के दरद ला जन जन तक देखाना चाहत हे। फेर चोटी के एजेंडा धारी मन एकर समस्या ला समस्या ही नइ माने। हम कहेन मनखे के मूलभूत जरूरत अउ समस्या ला भूतकाल मे ढकेल अउ भविष्य के योजना के रोना रो। एकर बर टोर भाँज के राजनीति करत एको ठन आदर्शवादी गठान मा जुड़ हम जानत हावन ये तोर पाँव के फोरा त्याग अउ समर्पन ले देश के अजादी बर रेँगे ले परे हे। नमक सत्याग्रह के नमक चाँट के जौन राष्ट्रभक्ति हासिल करे हव। एकर बर कोनो सम्मान बाटुक संस्था के नजर नइ परिस। फेर हाँ एकर दरद ला चारन कुल के कवि मन गा सकथें।
खानपान तेल मसाला ले उपजे दरद बर बूटी घुट्टी काम कर सकथे। फेर जे व्यवस्था के अवसान ले शुरू होथे, वोकर दरद आम जनता तक जाथे। इही आम मन कते दिन जनार्दन ले शोषित पीड़ित वंचित कुंठित सबो हो जाथें पता नइ चले। फेर कइसनो होय आम हे माने मौसम बेमौसम चुचरे के काम आवत तो हे। जे मन नइ खाँव कथे उँकर हैसियत बाढ़गे। अउ खावन नइ देववँ कथे माने जता हे ते वोकरे। तेरा तुझको अर्पण के मतलब तोर हक मा नरियर के बूच खोटली फोकला हे। आरती के बखत ठेंगवा उपर देखावत घंटी बजाए जाथे। तब जान ले भगवान ला घलो चेता देय जाथे कि जता चघावा चघिस सब मोर। अउ फेर पोलिया ग्रसित समाज ला रेचका डाँड़ी के बैसाखी मिलगे माने रेल रोको आंदोलन तो कर ही सकथे।
हड़जोड़ गठजोड़ मे सबले जादा माड़ी के पीरा दुखदाई होथे। माड़ी के मजबूती ले ही आदमी उहाँ तक जा सकथे जिहा मूडी मा ताज मुकुट पहिरे के प्रतियोगिता चलत हे। जेकर मूड़ी मा ये बात आइस कि भागमभाग के जमाना मा जोड़ के मजबूती जरूरी हे, वो मन गठबंधन अउ महागठबंधन के लेप लगाके राजधानी तक भागत हें। फेर इहाँ कनिहा टोरे के साजिश मा पक्ष विपक्ष सबो किसम के पइती लगा के बइठे हें। आम अउ खास के मनोविज्ञान कथे कि डारा काटे ले उल्होय के डर हे तेकर ले जड़ ला काटव। दूसर के पीरा मा घात प्रतिघात के सेंधमारी करे ले गठबंधन के गठान मा जे राष्ट्रव्यापी दरद शुरू होथे वो ठेकवा फोरे बर कम नइ रहय। सास बहू के गठबंधन ठीक हे तब तक घरू तंत्र के जोड़ मा दरद नइ जनाय जे दिन जोड़ मा दरद शुरू माने पारिवारिक विकलांगता ढीठ बसदेवा असन घुनघुना बजाना चालू कर देथे। भाई भाई के गठजोड़ मा पीरा बटवारा के भाँड़ी मा चढ़के धूप सेंकथे तब राहत मिलथे। भावना मा बहे बर भक्ति के लाईन अउ सत्संग बर भट्ठी जे आम जनता के पीराहारी बाम हे।
इहाँ कतको झन एकला चलव अउ एक होके चलव के भ्रामक उक्ती मा भेद नइ कर पाए हे। इहाँ जनादेश मा सहानुभूति के घुट्टी ला तंत्र मा परोसे जावत हे। इही कारन हे कि एन बखत मा चाहे शहर शहर होवय चाहे सीमा सरहद मा हुरहा वो सब होथे जेकर संका प्रायोजित अउ सुनियोजित होय के रथे। सुनियोजित ढंग ले घटे अनहोनी ले राष्ट्र प्रेम के झंडा निचे सहानुभूति के चार वोट सकेलना दरद उठे के पहिली उपचार आय। अउ जे मन महागठबंधन के रसता ले ग्राम सुराज बर लड़े के सोचत रथे, चरमरा जाथे। दू चार बागी बगिया के दलबदल के संक्रमण ले सुखी संसार मा प्रवेश करथे वो मन उँकर जोड़ के दरद बढ़ाके जाथे, जे मन समतामूलक समाज बर दाऊचौरा मा जुरियाय रिहिन।
अब के बेरा ला पनौतीकाल कहि सकथन। दोहन शोषण हरन छरन के दौर मा समरूप विचारधारा ले जुड़त हें, वो मन अस्थि मज्जा के रूप मा काम करत हें। तंत्र के असली हाड़ा आम जनता जेला रेवड़ी बाँटुक प्रथा के चिरहा मोटरी बोहा के विजय जलूस मा रेंगे बर मजबूती के साथ मजबूर करे जावत हे। जेमन तीसर पाँव बैसाखी असन के गठबंधन मा रेँगत हे, बिछले के डर ले बैसाखी ला मूँड़ी मा चढ़ाके रखथें। बैसाखी जानथे कि मँय सरकेंव माने ये तो गय। एकरे कारण मनचाहा पद पावर अउ विभाग असन मा समझौता के काढ़ा सँघरा पीयत रथें। जेकर ले एकाद पंचवर्षीय तो दबे दरद मा कट जाय। समझौता वादी परम्परा हर ही अवसरवादी परम्परा के जन्मदाता आय। सही अवसर देख के समझौता करे ले खुद के माड़ी कनिहा अउ बैसाखी के जोड़ मा मजबूती रथे। असली सच तो ये हे कि ये गठजोड़ मा जतका राँड़ी हे काड़ी बर डरुवा डरुवा के मूसर मा कब्जा करत रथें। कूटनीति के संबलता ले आगू वाले के जोड़ मा दरद उठथे वो न तो सोंठ गुर मे माड़े न तो स्वर्ण भस्म मा। तानाशाही सोच ले एकाधिकार के तंत्र संचालक के टाँग बातज पित्तज ले घलो टूटना तय रथे।
आखिर बेवस्था के मार ले जेन विकलांगता के दरद जनार्दन मन झेलत हें, बगियाहीं तेन दिन चतुर मन घलो चिक्कन रसता मा हपटहीं। अइसन हपटे के दरद भितरे भीतर सबो जोड़ मा भरथे। अऊ फेर जनादेश के खूँटी ले लगे खोँचकर के दरद माड़ी कनिहा कोहनी के जोड़ तक तो जाबे करही।
राजकुमार चौधरी "रौना"
टेड़ेसरा राजनांदगांव।
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