ज्ञानपीठ पुरस्कार ले सम्मानित छत्तीसगढ़ के पहिली साहित्यकार - विनोद कुमार शुक्ल
संस्कारधानी राजनांदगांव हिंदी साहित्य के बड़का साहित्यकार डा. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी , गजानन माधव मुक्तिबोध,डा. बल्देव प्रसाद मिश्र, शरद कोठारी,नंदू लाल चोटिया,डा. गणेश खरे जइसे साहित्यकार मन के कर्मभूमि हरे। इही संस्कारधानी म 59 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार ले सम्मानित छत्तीसगढ़ के पहिली अउ हिंदी साहित्य के 12 वें व्यक्ति, छत्तीसगढ़ शासन ले पहिली सुंदर लाल शर्मा सम्मान -2001 ले सम्मानित
विनोद कुमार शुक्ल के जनम 1 जनवरी 1937 के प्रतिष्ठित शुक्ल परिवार म होइस। राजनांदगांव के सोर बगराय म शुक्ल परिवार के अब्बड़ योगदान हे।
शुक्ल जी ह छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर म रहिके हिंदी साहित्य म सुघ्घर कारज करिन।वोहा
कविता,कहानी अउ उपन्यास लिख के हिंदी साहित्य जगत म अमर होगे।उंकर लिखे के विशिष्ट शैली ह वोला अलगे पहिचान दिस। कविता लेखन म साहित्यकार गजानन माधव मुक्तिबोध के मार्गदर्शन मिलिस।शुक्ल जी के पहिली कविता संग्रह " लगभग जयहिंद" बछर 1971 म प्रकाशित होइस।
बछर 1979 म उपन्यास "नौकर के कमीज" प्रकाशित होइस।ये उपन्यास ल अधार बना के फिल्म निर्देशक मणी कौल ह फिल्म बनाइस। 1997 म उपन्यास " दीवार में एक खिड़की रहती थी" प्रकाशित होइस। ये उपन्यास बर शुक्ल जी ल बछर 1999 के साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान करे गिस। अंतर्राष्ट्रीय साहित्य म उत्कृष्ट योगदान खातिर शुक्ल जी ल बछर 2023 के पेन/नाबोकेव पुरस्कार ले सम्मानित होइस। हिंदी साहित्य म उत्कृष्ट योगदान खातिर शुक्ल जी ल भारत के
सबले बड़का साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार -2024 (59 वां )ले सम्मानित करे गिस। येकर घोषणा 22 मार्च 2025 के होइस अउ अस्वस्थता के कारन 21 नवंबर 2025 के शुक्ल जी के घर रायपुर आके ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर. एन. तिवारी ह प्रदान करिस। पुरस्कार के तहत 11 लाख रुपए, वाग्देवी (सरस्वती) के कांस्य मूर्ति अउ प्रशस्ति पत्र प्रदान करे गिस।
शुक्ल जी के एक दर्जन कविता संग्रह, अउ आधा दर्जन उपन्यास अउ कहानी संग्रह प्रकाशित होइस।
23 दिसंबर 2025 म शुक्ल के देहावसान होइस।
जब शुक्ल जी संग भेंट होइस
शुक्ल जी संग मोर प्रत्यक्ष भेंट करीब बीस बछर पहिली उंकर जनम भूमि संस्कारधानी राजनांदगांव म होय रिहिस। शुक्ल जी ह साहित्यिक कार्यक्रम म आय रिहिस। दिग्विजय कालेज राजनांदगांव म स्थापित मुक्तिबोध स्मारक के भ्रमण करिस। शुक्ल जी संग देश के बड़का साहित्यकार केदार नाथ सिंह, विष्णु खरे जी ह घलो आय रिहिन। स्वतंत्रताए संग्राम सेनानी कन्हैयालाल अग्रवाल अउ छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के अध्यक्ष आत्मा राम कोशा अमात्य ह तीनों साहित्यकार ल मुक्तिबोध स्मारक के संबंध म जानकारी दिस। कन्हैयालाल अग्रवाल जी ह मुक्तिबोध जी ,बख्शी जी, डा. बल्देव प्रसाद मिश्र जी ले संबंधित संस्मरण सुनाइस।
येकर बाद रात म दिग्विजय कालेज के नवीन सभागार म साहित्यिक संगोष्ठी के आयोजन करे गिस जेमा शुक्ल जी ह -" एक साहित्यकार का संघर्ष" विषय म अपन विचार ले उपस्थित साहित्यकार अउ साहित्य रसिक मन ल अब्बड़ प्रभावित करिस। शुक्ल जी ह अपन जनम भूमि राजनांदगांव ले संबंधित कुछ संस्मरण सुनात बेरा अब्बड़ भावुक घलो होइस। शुक्ल जी के एक साहित्यकार के संघर्ष विषय ल सुनके जब मंय ह साइकिल म घर आत रेहेंव त रात होगे रिहिस। मोर साइकिल ह हरदी करा पंचर होगे। पंचर दुकान मन बंद होगे रिहिस मंय हा बिरबिट करिया रतिहा म दस किलोमीटर पैदल चलके अपन घर (सुरगी) पहुंचेव। वो समय ढोड़िया अउ मलपुरी करा के नरवा मन जगह लोगन मन ल डर लागय।
हिंदी साहित्य के अमर साहित्यकार श्रद्धेय विनोद कुमार शुक्ल जी ल शत् शत् नमन हे।
-ओमप्रकाश साहू "अंकुर"
सुरगी, राजनांदगांव
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