Monday, 5 January 2026

सकट चतुर्थी

 सकट चतुर्थी

       


              भारतीय संस्कृति मा चंदा, सुरुज के संग ग्रह नक्षत्र के पूजा पाठ बारो महीना चलते रथे। वइसने एक पूजा या व्रत होथे, सकट तिहार। ये तिहार के दिन चौथ के चंदा मा भगवान गणेश ला विराजे मानके। ओखर दर्शन करके दाई, बेटी, बहिनी मन, अपन निर्जला ब्रत ला तोड़थें, अउ अपन लइका लोग के सुख समृद्धि के कामना करथें। ये सन्दर्भ मा एक कथा आथे कि, भगवान शिव हा, पार्वती द्वारा मइल ले बनाय गणेश जी के मुड़ी ला काट देथे, जेखर ले पार्वती बहुत दुखी हो जथे, अउ जब गणेश जी ला जिंदा करे बर कथे, ता ओखर मुड़ मा हाथी के मूड़ लगाथे। पावर्ती देख के खुश होथे, फेर जब अपन लइका के पहली वाले कटे मुड़ी ला देखथे ता विलाप करे लगथे। पार्वती ला विलाप करत देख, ओखर प्रण, व्रत अउ इच्छा अनुसार वो मुड़ी ला चन्द्रमा मा, शिव जी हा शुशोभित कर देथें, अउ उही दिन ले सकट तिहार के चलागन माने जाथे। माता पार्वती अपन लइका गणेश के पुर्नजीवन अउ कटे मुड़ी के संसो बर निर्जला व्रत रहिके, भगवान शिव ला अपन बात मनवाथे। तपोबल ले प्रभावित भगवान शिव, चन्द्रमा मा मुड़ ला स्थापित करे के बाद, ये आषीश देथें कि सकट के दिन जउन भी महतारी मन, चाँद ल देखत पूजा पाठ करहीं, उंखर लइका लोग के सब संकट दुरिहा जही। उपास धास के ये सिलसिला आदि समय ले अभो सरलग चलत आवत हे।    

                 

                     छत्तीसगढ़ मा ज्यादातर ये उपास ला लोधी अउ कुर्मी समाज के बेटी माई मन रहिथे। पहली कस आजो ये तिहार मा, बेटी माई मन, अपन मइके मा जुरियाके सबो सँवागा सजाके रतिहा चंदा ला नमन करत अपन निर्जला व्रत ला तोड़थें अउ लइका लोग घर परिवार के सुख समृद्धि के कामना करथें। ये दिन माटी के खिलौना, जेमा डोंगा, बाँटी,भौरा के साथ साथ पापड़, तिली लाड़ू, कोमहड़ा पाग, पूड़ी, खीर, अइरसा आदि पकवान बनाये जाथे, अउ भगवान चन्द्र गणेश ला भोग लगाय जाथे। भगवान  चंद्र गणेश ला कच्चा दूध, फूल, पान, नरियर ,अगरबती, हूम धूम आदि चढ़ाए जाथे। ये परब ला सकट चतुर्थी घलो कथे। कुछ मन चौथ के चाँद के जघा तीज के चाँद ला घलो भगवान चन्द्र गणेश मानके सकट उपास रथे।  ददा भाई मन ये तिहार के पहली अपन बेटी बहिनी ला घर ले आथे। बेटी माई मन मइके मा ये उपास ला रथें। व्रत तिहार कोनो भी होय सबके मूल मा सुख समृद्धि के कामना जुड़े हें, वइसनेच मया मेल, सुख- समृद्धि के परब आय सकट चौथ।।

          

                         उपास धास कभू भी देखावा नइ होय, ओखर मूल मा सुखसमृद्धि के कामना ही रथे, फेर आज सोसल मीडिया के युग मा लगातार नवा नवा फिजूल चोचला चिंतनीय हे। कथे भगवान भाव के भूखा ए, तभे तो सकट उपास मा  महंगा मेवा मिष्ठान के जगह महतारी मन तिल गुड़ के भोग लगाके भगवान चंद्र गणेश ला मनाथें, अउ देख देखावा ले दुरिहा रथें। सकट उपास मा, कुछ जगह सकट माता के घलो जिक्र होथे। सकट माता मां दुर्गा के ही रूप आय, जेला चौथ माता भी कहिथे। राजस्थान मा चौथ माता के कई मंदिर भी मिलथे। वइसे छत्तीसगढ़ मा सकट के दिन चंद्र दर्शन के ही चलागन हे। चंदा मा भगवान गणेश के प्रतिमूर्ती मानके पूजा पाठ करथें। उपास ले भक्ति भाव के संग तन के स्वस्थता घलो बने रथे। ते पाय के ये सब तिहार बार के बहाना उपास जेखर से भी बन सकथे, रहना चाही। उपास सुख समृद्धि के साथ जुड़ाव के काम घलो करथे। ये सब उपास मइके, ससुराल के संग पारा, परोसी मा प्रेम बढ़ाथे। जय भगवान चंद्र गणेश,जय सकट माता।


सकट तिहार-कुंडलियाँ


मइके मा जुरियाय हें, दीदी बहिनी आज।

सकट तिहार मनात हें, थारी दिया सजात।

थारी दिया सजात, हवैं बेटी माई मन।

लाड़ू पापड़ खीर, बनावत हें दाई मन।।

माँगे मया दुलार, गजानन ले व्रत रइके।

हाँसत खेलत रोज, रहै ससुरार अउ मइके।


जीतेंद्र वर्मा"खैरझिटिया"

बाल्को,कोरबा(छग)

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