Saturday, 24 January 2026

तिसरइया चूल्हा

 तिसरइया चूल्हा

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रामसिंग के बेवा राम्हिन हा गाँव के सरपंच, पटइल, पंच अउ सियान मन ला बलाये हे। जम्मों झन सकलाके अँगना मा बइठे हें।

सरपंच हा पूछिस-- का बात ये रामहिन। सियान मन ला कइसे बलाये हस वो?

" का बताववँ ददा---तुमन तो जानते हव। मोर दूनों बेटा-बहू मन इही घर मा अलग-बिलग रहिथें--दूनों के चूल्हा अलग-अलग जलथे।खेती-खार ला तको आधा -आधा बाँट डरे हें।वो मन तो अपन मा मस्त हे। मोरे बारा हाल होगे हे--रामहिन कहिस।

"तोला भला का बात के दुख होगे तेमा वो? तोर बेटा मन अलग बिलग होइन तेनो दिन सकलाये रहेन। बात अइसे होये रहिस के-तोर खाना पीना एक महिना बड़े घर ता एक महिना छोटे घर होही। तोर सेवा सटका, सूजी पानी ला दूनों झन करहीं। ये बात मा कोनो फरक परगे हे का?--पटइल हा पूछिस।

"हव सियान ददा। दू-चार महिना हा बने बने चलिच तहाँ ले-- मोर बर साग हे ता भात नइये, भात हे साग नइये। कभू कभू तो दिन भर लाँघन तको रहे ला पर जथे।"

"अच्छा ये समस्या हे। कइसे जी  तुंहर का कहना हे? सरपंच हा वोकर बेटा मन ला पूछिस।

"नहीं सरपंच साहब --अइसे बात नइये।दाई हा गलत बोलत हे"--बड़े बेटा हा बोलिस।

छोटे हा तो सीधा-सीधा कहि दिच के दाई हा कोरा झूठ बोलत हे।

"मैं झूठ काबर बोलहूँ सियान हो। अब मैं इंकर सो नइ रहे सकवँ। मोर कोनो आने बेवस्ता बना देतेव"--रामहिन हाथ जोर के कहिच।

वोकर अरजी ला सुनके सियान मन आपस मा बिचार करके सरपंच ला फइसला सुनाये ला कहिन।

"सुन ओ रामहिन अइसे करबे। तोर नाम मा जेन छै-सात एकड़ खेत हे तेला अपन जियत ले अधिया-रेगहा देके अपन खर्चा चलाबे।नहीं ते बेंच बेंच के जीबे अउ तोर दूनों बेटा मन ये घर मा रइहीं तेकर सेती एकक हजार रुपिया हर महिना देहीं। नइ देना रइही ता कहूँ राहयँ। ये घर हा तोर ये। तैं अपन चूल्हा अलग जला ले। ठीक हे ना वो रामहिन"--सरपंच हा कहिस।

"हव सियान ददा मोला मंजूर हे"--रामहिन कहिस।

" नहीं भई। तिसरइया चूल्हा काबर जलही। मैं दाई ला अपन संग पोगरी राखहूँ। कोनो शिकायत के मौका नइ आवन देववँ "--बड़े बेटा हा हाथ जोर के कहिच।

"वाह अइसे कइसे होही।दाई ला अपन संग महूँ राख सकथवँ। नहीं ते सबे कोई एके  मा रहिबो"--छोटे बेटा हा कहिच।

बिन सेवा के मेवा बर बेटा मन के  लालच ला देखके सरपंच संग जम्मों सियान मन के अंतस मा गुस्सा संग दुख भरगे।


चोवा राम वर्मा 'बादल '

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