आजादी के लड़ाई मा छत्तीसगढ़ के योगदान
भारत हा पहिली सोन के चिरइया कहलाय। हमर देश मा बेपार करे खातिर पुर्तगाली, फ्रांसीसी,डच अउ अंग्रेज मन आइस। पहिली इंकर मन के बीच बेपार खातिर आपसी लड़ाई चलिस जेमा आगू चलके अंग्रेज मन हमर देश मा राज करे मा सफल होइस । अंग्रेज मन फूट डालव अउ राज करव के संगे संग रियासत मन बर हड़प नीति अपनाके करीब दू सौ बछर ले जादा समय तक सरलग राज करिस । अंग्रेज मन के अत्याचार अउ कइ ठक उंकर गलत नीति के कारन इहां के राजा -महाराजा, जमींदार अउ आम मनखे मन मा भीतरे भीतर आगी सुलगत गिस।येकर पहिली परिणाम सन 1857 मा अंग्रेज मन ले राजा महाराजा मन के लड़ाई के रुप मा आगू आइस ।
अंग्रेज मन ले हमर भारत देस ल अजाद कराय के पुन्य काम म हमर छत्तीसगढ के सुघ्घर योगदान हे. हमर छत्तीसगढ़ के मनखे मन अब्बड़ सिधवा अउ शांतप्रिय रेहे हे। तइहा जमाना ले इहां के कृषि अउ ऋषि संस्कृति सुघ्घर सोर बगरे हावय।पर जब कोनो ह जबरन इहां के रहवासी मन के सोसन अउ अतियाचार करे ला लगथे ता अपन हक खातिर जुर मिल के लड़े मा कभू पाछु नइ रिहिन हे। अइसने छत्तीसगढ़ के रहवासी मन अजादी के लड़ाई म बढ़ -चढ़ के भाग लिन. अंग्रेजी सासन ले लड़ाई करके सबले पहिली सहीद होइन बस्तर क्षेत्र के परलकोट के जमींदार गेंद सिंह हा. 1825 म अंग्रेज मन वोला उंकरे महल के आगू फांसी म लटका दिस. सन 1857 मा भारत के राजा- महाराजा मन अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संगठित होके लड़ाई लड़िन जेला प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्रामकहे जाथे। जब पूरा भारत वर्ष मा अंग्रेज मन बर चिंगारी सुलगत रिहिस ता छत्तीसगढ़ हा कइसे पाछु रहितिस। जब हमर देश मा मंगल पांडे,तात्या टोपे,नाना शाहब पेशवा, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, बहादुर शाह जफर,राजा कुंवर सिंह अउ आने राजा मन अंग्रेजी शासन ले जोम देके लड़िन तब येकर असर छत्तीसगढ़ के सोनाखान जमींदारी मा देखे ला मिलिस। सन् 1857 के पहिली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम म सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह के अंग्रेज मन ले छापामार लड़ाई ले कोनो अनजान नइ हे.जब सोनाखान क्षेत्र मा अकाल पड़िस ता सोनाखान के जमींदार वीर नारायण सिंह हा करौद गांव,कसडोल के बेपारी माखन लाल बनिया के गोदाम ले अनाज लूट के जनता मा बंटवा दिस । माखन बनिया हा येकर शिकायत रायपुर के डिप्टी कमिश्नर चार्ल्स सी. इलियट ले करिन।24 अक्टूबर 1856 मा अंग्रेज अधिकारी कैप्टन स्मिथ हा वीर नारायण सिंह ला संबलपुर ले गिरफ्तार कर रायपुर जेल मा बंद कर दिस । 10 दिसंबर 1857 म वीर नारायण सिंह ल रायपुर के जयस्तंभ चौक म फांसी म चढ़ा दिस. वीर नारायण सिंह के सहादत के बाद 10 जनवरी 1858 तक क्षेत्र मा नंगत के अशांति फैलगे । येकर ले हमर छत्तीसगढ़ मा अंग्रेज मन के विरुद्ध चिंगारी फूटे ला लगिस। वीर नारायण सिंह के सहादत हा बैंसवाड़ा के राजपूत अउ छत्तीसगढ़ के मंगल पांडे वीर हनुमान सिंह ला अंग्रेजी सासन ले लड़े बर प्रेरित करिन. हनुमान सिंह तीसरी बटालियन मा मैग्जीन लश्कर के पद मा तैनात रिहिन । 18 जनवरी सन 1858 मा संझा साढ़े सात बजे वीर हनुमान सिंह हा तीसरी बटालियन के सार्जेंट मेजर सिडवल के घर मा घूंसके उंकर हत्या कर दिस । हनुमान सिंह के सत्रह संगवारी मन ला लेफ्टिनेंट स्मिथ के अगुवाई मा गिरफ्तार कर ले गिस ।
अइसने संबलपुर सरगुजा क्षेत्र के उदयपुर रियासत अउ सोहागपुर मा अंग्रेज मन के विरूद्ध विद्रोह होइस।ये प्रकार ले देखथन कि छत्तीसगढ़ क्षेत्र मा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मा कतको राजा, जमींदार,सैनिक अउ नागरिक मन भाग लिस पर अंग्रेज मन हा आने राजा अउ जमींदार मन के सहयोग ले विद्रोह ला दबाय मा सफल होगे।
जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मा गरम दल के नेता मन के धाक जमे लगिस तब भारतीय जनता म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध भीतरे- भीतर आगी सुलगत गिस । वो समय लाल-बाल-पाल के रूप म लाला लाजपतराय, लोकमान्य बालगंगाधर तिलक अउ विपिनचंद्र पाल के अब्बड़ सोर रिहिस । 1905 म बंगाल विभाजन ले ये चिंगारी ह आगी बन गे अउ जनता मन अंग्रेज़ी सासन बर बागी बनगे । सन 1907 मा कांग्रेस हा गरम दल अउ नरम दल के रूप मा विभाजन होगे।येकर असर छत्तीसगढ़ मा अब्बड़ पड़िस। हमर देश के नेता मन जनता ल समझाय लगिस कि अंग्रेजी सासन फूट डालव अउ राज करव के नीति ल अपना के शुरू ले सासन करत आवत हे अउ बंगाल के विभाजन येकर एक बड़का उदाहरण हे । देशभर म अंग्रेजी सासन के विरुद्ध वातावरण बनिस। अइसन बेरा म हमर छत्तीसगढ़ मा घलो असंतोष के चिंगारी सुलगत गिस। अइसन बेरा मा छत्तीसगढ़ मा गरम दल के नेता के रूप मा माधव राव सप्रे, पं. रविशंकर शुक्ल,दादा साहब खापर्डे, वामन राव लाखे, ई. राघवेन्द्र राव, हनुमान सिंह,लक्ष्मण राव उदगीरकर मन उभर के आगू आइस । येमन 1907 मा तात्यापारा हनुमान मंदिर के तीर जनसभा ला संबोधित करके विदेशी सामान मन के बहिष्कार अउ स्वदेशी सामान मन ला अपनाय बर समझाइस।
सन 1907 मा लोकमान्य बालगंगाधर तिलक हा बिलासपुर के यात्रा करिन।तिलक जी हा नागन्ना बाबू के घर रूकिस। 1907 म राजनांदगांव में ठाकुर प्यारेलाल सिंह के अगुवाई म देश के पहिली छात्र हड़ताल होइस । ये हड़ताल लोकमान्य बालगंगाधर तिलक के गिरफ्तारी के विरोध मा स्टेट हाईस्कूल नांदगांव मा होय रिहिस । ठाकुर साहब अपन सहयोगी नंदलाल झा,छविराम चौबे अउ गज्जू लाल शर्मा के संग मिलके राजनांदगांव म राष्ट्रीय आंदोलन ल ठाहिल बनाइस । ये देश के छात्र मन के पहली हड़ताल माने जाथे। अइसन दौर म छत्तीसगढ़ के कांग्रेस सदस्य मन घलो गरम दल के नेता मन ले प्रभावित होके उंकर संग सामिल होगे । लोकमान्य बालगंगाधर तिलक हा जनवरी 1918 मा लखनऊ ले कलकत्ता जाय के समय रास्ता मा दुर्ग, रायपुर अउ बिलासपुर मा आमसभा ला संबोधित करिन । 1918 मा पं. सुंदर लाल शर्मा हा अछूतोद्धार कार्यक्रम चलाइस। राजनांदगांव मा ये कारज पं. छविराम चौबे हा करिस। अंग्रेजी शासन के काला कानून रोलेट एक्ट के विरोध मा रायपुर, बिलासपुर, रतनपुर, राजनांदगांव, राजिम मा 30 मार्च 1919 मा काला दिवस के रूप मा मनाय गिस । 30 मार्च 1919 मा रायपुर मा माधव राव सप्रे अउ राष्ट्र कवि माखन लाल चतुर्वेदी हा मध्य प्रांत हिंदी साहित्य सम्मेलन के आयोजन करिन जेकर उद्देश्य लोगन मा जनजागरण फैलाना रिहिस । सन 1920 मा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर मा जिला राजनीतिक सम्मेलन होइस । येमा रोलेट एक्ट अउ जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध करे गिस ।
हमर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के आदिवासी मन के जिनगी जल, जंगल अउ जमीन पर टिके हावे । आदिवासी मन अब्बड़ सिधवा रहिथे अउ अपन संस्कृति, संस्कार ला पालन करत सुघ्घर जिनगी बितात रहिथे पर जब कोनो उंकर स्वाभिमान ला ठेस पहुंचाथे ता वोमन डोमी करिया कस फूंफकारे ला लगथे । अपन सुरक्षा खातिर तीर कमान ले निसाना लगाय बर नइ चुके । अइसने निरंकुश राजशाही अउ अंग्रेज मन के गलत वन नीति के कारण बस्तर क्षेत्र मा सन 1910 मा विद्रोह होइस तेला भूमकाल विद्रोह के नांव ले जाने जाथे । रानी सुवर्ण कुंवर,लाल कलेन्द्र सिंह हा ये आंदोलन के अगुवाई करे के जिम्मेदारी नेतानार गांव के रहवइया नवजवान आदिवासी वीर गुंडाधूर ला सौंपिस। वीर गुंडाधूर बस्तर के स्वाभिमान के प्रतीक माने जाथे । नायक वीर गुंडाधूर ला अंग्रेजी शासन आखिरी तक नइ पकड़ पाइस ।
गांधी जी जब पहिली बार 20 दिसंबर 1920 मा छत्तीसगढ़ आइस त इहां के नेतामन के संगे-संग जनता मन म अब्बड़ उछाह छागे । गांधी जी संग मौलाना शौकत अली घलो आय रिहिन । गाधी जी रायपुर के गांधी चौक मा सभा ला संबोधन करके असहयोग आन्दोलन के महत्ता ला बताइस । छत्तीसगढ़ के नारी मन गांधी जी ला तिलक स्वराज फंड खातिर लगभग दो हजार रूपया के आभूषण भेंट करिन । गांधी जी धमतरी क्षेत्र के कंडेल नहर सत्याग्रह के सिलसिले म आय रिहिन । गांधी जी के छत्तीसगढ़ आय ले अंग्रेजी सासन म हड़कंप मचगे।कंडेल नहर सत्याग्रह के अगुवाई पं. सुंदर लाल शर्मा करिन अउ सहयोगी मन मा छोटे लाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेघावाले, नत्थूजी जगताप सामिल रिहिन । येकर संबंध असहयोग आंदोलन ले रिहिस । गांधी जी के कंडेल जाय से पहिलीच अंग्रेजी सासन ह आंदोलनरत किसान अउ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मन के बात ल मान लिस।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहर मन मा सन 1921 मा स्कूल कालेज के बहिष्कार करके राष्ट्रीय विद्यालय, सत्याग्रह अउ असहयोग आश्रम खोले गिस । 12 मई 1921मा राष्ट्र कवि अउ कर्मवीर पत्रिका के संपादक माखन लाल चतुर्वेदी ला बिलासपुर मा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जमगरहा भाषण देय खातिर गिरफ्तार कर जेल भेज दे गिस । 5 जुलाई 1921 मा असहयोग आन्दोलन के समर्थन मा प्रचार प्रसार बर राष्ट्रीय नेता मन बिलासपुर पहुंचिस जेमा डा. राजेन्द्र प्रसाद,सी. राजगोपालाचारी अउ कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान मन पहुंच के आम सभा ला संबोधित करिस। अइसने रायपुर मा गांधी चौक मा जमनालाल बजाज अउ मौलाना कुतुबुद्दीन हा जनता मन ला संबोधित करके उछाह बढ़ाइस।
21 जनवरी 1922 मा धमतरी के सिहावा नगरी मा छत्तीसगढ़ के पहिली जंगल सत्याग्रह चालू होइस। अंग्रेजी शासन के गलत वन नीति, आदिवासी मजदूर मन के शोषण के विरोध मा येकर अगुवाई पं. सुंदर लाल शर्मा, छोटे लाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेघावाले के संगे संग स्थानीय नेता शोभा राम साहू, श्याम लाल,बिसंभर पटेल मन करिन। 1924 में जब बीएनसी मिल के दुबारा हड़ताल चालू होइस तब ठाकुर प्यारेलाल सिंह ल जिला बदल कर दे गिस। राजनांदगांव ले निष्कासित करे के बाद सन 1925 म ठाकुर साहब रायपुर चले गे अउ अपन जिनगी के आखिरी तक ऊंहचे रहि के अपन राजनीतिक काम मन ल संचालन करत रिहिन।
26 जनवरी 1930 मा पुरा भारत वर्ष मा स्वाधीनता दिवस के रूप म मनाय गिस । गांधी जी देशवासी मन ले आह्वान कर चुके रिहिन कि स्थानीय समस्या ल लेके आंदोलन चालू करय । येकर असर पूरा छत्तीसगढ़ मा देखे ला मिलिस । 26 जनवरी 1930 मा पूरा देश जइसे छत्तीसगढ़ मा घलो प्रतिज्ञा दिवस मनाके पूर्ण स्वाधीनता के मांग दुहराय गिस । रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, जांजगीर चांपा अउ आने जगह मा राष्ट्रीय झंडा फहराय गिस । गांधी जी द्वारा चलाय गे नमक कानून तोड़व आंदोलन छत्तीसगढ़ मा अब्बड़ जोर पकड़िस ।
9 दिसंबर 1930 मा महासमुंद के तमोरा गांव मा जंगल सत्याग्रह के समय बालिका दयावती हा महिला मन संग जंगल गिस । महिला मन ला जब अनुविभागीय अधिकारी एम.पी. दुबे हा रोके के उदिम करिस ता बालिका दयावती हा वोला तमाचा मार दिस ।
हमर छत्तीसगढ़ मा महात्मा गांधी के दूसरइया बार अवई छुआछूत ला दूर करे के उद्देश्य ले 22 नवम्बर 1933 के होइस अउ हफ्ता भर रिहिन । ये समय गांधी जी संग मीराबेन, ठक्कर बापा, महादेव भाई देसाई मन आय रिहिन। गांधी जी के छत्तीसगढ़ दौरा ले इहां के राजनेता अउ आम मनखे मन मा स्वतंत्रता के प्रति जागृति भाव मा बढ़वार होइस। गांधी जी हा सबले पहिली दुर्ग पहुंच के मोती तरिया के पास एक बड़का सभा ला संबोधित करिन जेमा करीब 25 हजार लोगन मन गांधी जी के दरसन करे बर पहुंचिस । 18 जनवरी 1940 मा सरदार वल्लभ भाई पटेल हा रायपुर पहुंच के कार्यकर्ता मन मा जोश भरिस। 1938 मा छुईखदान मा समारू बरई अउ राजनांदगांव जिला के छुरिया, घोघरे, बापूटोला मा 3 जनवरी 1939 मा विद्या प्रसाद यादव अउ विश्वेश्वर प्रसाद यादव के अगुवाई मा जंगल सत्याग्रह होइस । राजनांदगांव म विद्रोही कवि कुंज बिहारी चौबे छात्र जीवन म अंग्रेज शासन के झंडा ल उतार के भारतीय झंडा फहरा दिस । येकर सेति वोला बेत ले अब्बड़ मारे गिस पर वोहा महात्मा गांधी के जय अउ भारत माता के जय कहत गिस । 21 जनवरी 1939 मा राजनांदगांव जिला के छुरिया क्षेत्र मा जंगल सत्याग्रह चलिस जेमा बादराटोला गांव के आदिवासी युवक रामाधीन गोंड उपर गोली चला दे गिस जेमा वोहा शहीद होगे । इहां बुद्धू लाल साहू के अगुवाई मा अंग्रेजी शासन के गलत वन नीति के कारन जंगल सत्याग्रह चालू होय रिहिस । महात्मा गांधी के आह्वान मा 17 अक्टूबर 1940 मा देशभर मा व्यक्तिगत सत्याग्रह चालू होइस। ये समय छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, धमतरी मा स्थानीय कार्यकर्ता मन व्यक्तिगत सत्याग्रह ला सफल बनाइस।
1942 मा रायपुर षड्यंत्र केस इतिहास मा अमर होगे। छत्तीसगढ़ के भगत सिंह परस राम सोनी के अगुवाई मा विस्फोट सामग्री अउ बम बनाय के काम चलिस। परसराम सोनी के संगवारी मन मा गिरी लाल लोहार, सुधीर मुखर्जी, दशरथ लाल दुबे, प्रेमचंद वासनिक,क्रांति कुमार भारतीय, बिहारी चौबे ,कुंज बिहारी चौबे,गोवर्धन राम, समर सिंह ,बहादुर , भूपेंद्रनाथ मुखर्जी, सुरेंद्रनाथ दास ,सीताराम शास्त्री, निखिल भूषण सूर अउ देविकांत झा सामिल रिहिन। परसराम सोनी ला सात बछर के सजा सुनाय गिस ।
8 अगस्त 1942 मा बंबई मा आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बैठक मा छत्तीसगढ़ के राजनेता मन भाग लिस। गांधी जी हा 9 अगस्त 1942 ले भारत छोड़ो आंदोलन के चालू होय के घोषणा करिन। आंदोलन चालू होय ले पहिली गांधी जी सहित देश के सबो बड़का नेता मन ला अंग्रेजी शासन हा गिरफ्तार कर लिस। बंबई बैठक मा सामिल छत्तीसगढ़ के ग्यारह राजनेता मन ला घलो मलकापुर रेलवे स्टेशन ले गिरफ्तार करके नागपुर जेल मा बंद कर दे गिस। छत्तीसगढ़ मा भारत छोड़ो आंदोलन जोर पकड़ लिस । सबो जिला के स्थानीय नेता मन ला अंग्रेजी शासन गिरफ्तार कर लिस तब इहां के कार्यकर्ता अउ रहवासी मन आजादी के लड़ाई मा खुदे आगू आके आंदोलन ला सफल बनाइस । इहां के आजादी के सेनानी मन अंग्रेजी शासन ले जोम देके लड़िस । हमर छत्तीसगढ़ ले आजादी के लड़ाई म अपन योगदान देवइया मन म शहीद गेंद सिंह,वीर नारायण सिंह, हनुमान सिंह, सुरेन्द्र साय, कल्याण सिंह,वीर गुंडाधूर, पं. सुंदर लाल शर्मा, पं. रविशंकर शुक्ल, माधव राव सप्रे, दादा साहब खापर्डे, डा. मुंजे, कुंज बिहारी अग्निहोत्री, शहीद रामाधीन गोंड, ठाकुर प्यारेलाल लाल सिंह, केदार नाथ ठाकुर, डा. ई. राघवेन्द्र राव, बैरिस्टर छेदी लाल, घनश्याम सिंह गुप्त, मुंशी अब्दुल रउफ मेहवी, वामन राव लाखे, नारायण राव मेधावाले, पं माखन लाल चतुर्वेदी, हरख राम सोम, विशंभर पटेल, पंचम सिंह सोम, शोभा राम साहू, शिवदास डागा, महंत लक्ष्मी नारायण दास, महंत नयन दास, कुंज बिहारी चौबे, यति यतन लाल, क्रांति कुमार भारतीय, डा. खूबचंद बघेल, डा. राधा बाई, बालिका दयावती, बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव, राम प्रसाद देशमुख, शोभा राम साहू, बुद्ध लाल साहू, हीरा लाल सोनबोइर,नरसिंह प्रसाद अग्रवाल, वाय, व्ही. तामस्कर, रत्नाकर झा, रघुनंदन सिंगरौल, नत्थू जी जगताप, सेठ गोविंददास, पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र, गयाचरण त्रिवेदी, राम गोपाल तिवारी, गजाधर साव, कालीचरण शुक्ल, गंगाधर प्रसाद चौबे, नंद कुमार दानी, आनंद राम गोंड, श्याम लाल गोंड, फिरतू राम गोंडा, मंगलू गोंड, शंकर राव गनौद वाले, बालक बलीराम आजाद, अवध राम सोनी, पं. मुरलीधर मिश्र, कैलाश चंद्र श्रीवास्तव, कन्हैया लाल सोनी, परस राम सोनी, सुधीर मुखर्जी, रामचंद्र, बल्देव प्रसाद मिश्र, गोवर्धन लाल श्रीवास्तव, सखा राम रूईकर, शिव लाल मास्टर, केलकर, हरि सिंह गौर, शंकर खरे, तुलसी प्रसाद मिश्रा, विश्राम दास बैरागी, विश्वेश्वर प्रसाद यादव, विद्या प्रसाद यादव, कन्हैया लाल अग्रवाल, दामोदर दास टावरी, पं. राम नारायण मिश्र हर्षल, समारू बरई, वली मोहम्मद, इंदु केंवट, अरिमर्दन गिरि, रामाधार दुबे, वासुदेव देवरस, शेख मुंतजीमुद्दीन, सी.एम. ठक्कर, बद्री प्रसाद साव, राम राव चिंचोलकर, राजू लाल शर्मा, छवि लाल चौबे, पं. विष्णु दत्त शुक्ल, असगर अली, सोमेश्वर शुक्ल,जमुना प्रसाद वर्मा, विद्याचरण वर्मा, कैलाश सक्सेना, अब्दुल कादिर सिद्दीकी, बल्देव सतनामी, याकूब अली, ठाकुर राम कृष्ण सिंह सहित आने नांव सामिल है.
भारतीय मन के अंग्रेजी शासन ले अब्बड़ लड़ाई के बाद भारत 15 अगस्त 1947 मा आजाद होइस । बिरबिट करिया रतिहा के बाद नवां बिहान आइस । अंग्रेज मन के सैकड़ों बछर के गुलामी के बाद भारतमाता हा मुक्त होइस अउ ये प्रकार ले अब इहां के जनता मन खुद मालिक बनगे । भारत मा अब राजा महाराजा मन के शासन समाप्त होके जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि मन के शासन चालू होइस। भारत के तरक्की के रद्दा खुलगे । अठहत्तर बछर मा हमर भारत अउ छत्तीसगढ़ के सुघ्घर विकास होइस ।हम सब के कर्तव्य बनथे कि महापुरूष अउ सहीद मन के बताय रद्दा मा चल के देश के विकास मा योगदान देवन।
भारत माता की जय । जय छत्तीसगढ़ ।
ओमप्रकाश साहू अंकुर
ग्राम व पोष्ट - सुरगी
जिला व तह. - राजनांदगॉंव छ.ग.
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