*ओटीपी*(नान्हे कहिनी)
हमर पारा के समारिन दाई सोसायटी के सेल्समैन ला बखानत घर कोती आवत राहय। में उही समे ओला पूछ परेंव-का होगे दाई? तें काबर बिफरत हस?
डोकरी दाई रोवांसी होवत किथे-का बतावंव बेटा! मोर अंगरी के चिनहा सब खिया गेहे। सोसायटी में आधार नी बताय किथे। मोबाईल में ओटीपी आही अउ ओला बताहूं तब चांउर ला देही कथे।नाती टूरा के नंबर ला मोर अधार कारड में जोड़वाय हंव।ओकरे भरोसा में दाना मिलही।कोन जनी अउ का का नाच नचाही सरकार हा।जावत हंव टूरा ला खोजे बर।मिलगे त ठीक हे नीते काली फेर भुगतना भुगतहूं। सरकार कथे कि सब ला सुविधा देवत हंव फेर यहा का सुविधा हरे ददा।बारा नाच नचावत हे।
में ओला बताएंव कि सरकार हा फर्जी मनखे मन ला योजना के लाभ लेयबर रोके बर अउ सही मनखे तक लाभ पहुंचाय बर ए बेवस्था ला बनाय हे दाई।
ओहा तुरते किथे-यहा ऊमर में लटपट चलना फिरना होथे बेटा।जांगर थक गेहे।आंखी के अंजोर घलो पतरावत हे।हाथ के छापा मेटा गेहे।कांपथे हाथ हा।सरी ऊमर कमावत हाथ मा फोरा अउ गठान परगे त का हा छपही।हमर असन गरीब मन के चांउर बर अतेक जांच पड़ताल अउ तमाशा।अउ दू मंजिला मकान ढाले गौंटिया मन बर दसो ठन कारड में घर पहुंच सुविधा हे बेटा!!
भगवान बैरी घलो नी लेगत हे।ताहन आगी लगे उंकर ओटीपी ला।
अइसने बड़बडा़वत दाई चलदिस अउ ओकर गोठ मोर कान में खुसरके दिमाग ला अभी तक कोचकत हे।
रीझे यादव टेंगनाबासा
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