लघुकथा
छत्तीसगढ़िया
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मंगलू हाअपन सुवारी के इलाज करवाये बर अम्बेडकर अस्पताल रायपुर आये रहिसे। चार दिन पाछू घर वापस आये बर स्टेशन आइस त लोकल गाड़ी हा प्लेटफार्म ले छूटइया रहिस। लकर धकर चढ़ गेइन। खोजे म खाली सीट नइ मिलीच फेर एक झन सेठ असन दिखत आदमी हा तीन मनखे वाला लम्बा सीट म गोड़ लमा के पसरे राहय। वोमन ये आशा म के सीट दे दिही सोंच के उही मेर जाके खड़ा होगें। ओ आदमी ह कन्नेखी देखिच फेर उठ के नइ बइठीच।मंगलू हा तको कुछु नइ बोलीच अउ अपन छत्तीसगढ़ियापन ला देखावत सुटुर-सुटुर आगू बढ़गे।छत्तीसगढ़िया अपन हक ला माँगथे का?
चोवा राम वर्मा 'बादल'
हथबंद, छत्तीसगढ़
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