Monday, 5 January 2026

छत्तीसगढ़िया

 छत्तीसगढ़िया

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मंगलू हाअपन सुवारी के इलाज करवाये बर अम्बेडकर अस्पताल रायपुर आये रहिसे। चार दिन पाछू घर वापस आये बर स्टेशन आइस त लोकल गाड़ी हा प्लेटफार्म ले छूटइया रहिस। लकर धकर चढ़ गेइन। खोजे म खाली सीट नइ मिलीच फेर एक झन सेठ असन दिखत आदमी हा तीन मनखे वाला लम्बा सीट म गोड़ लमा के पसरे राहय। वोमन ये आशा म के सीट दे दिही सोंच के उही मेर जाके खड़ा होगें। ओ आदमी ह कन्नेखी देखिच फेर उठ के नइ बइठीच।मंगलू हा तको कुछु नइ बोलीच अउ अपन छत्तीसगढ़ियापन ला देखावत सुटुर-सुटुर आगू बढ़गे फेर दसे-बीस कदम आगू बढ़े रहिस होही वो लहुट के आइस अउ सीट म पसरे मनखे ल कहिच --

"ये जी तैं उठ तो हमू मन ला बइ ठना हे। " 

"अरे जाओ आगे जाकर सीट खोज लो"--वो मनखे कहिच।

" जब इही मेर सीट हे त आगू जाके काबर खोजबो। तैं तो एके झन के टिकिट कटवाये होबे अउ तीन-तीन झन के सीट ल पोगराये हच --चल उठ"-- मंगलू हा थोकुन टाँठ भाखा मा कहिच। आजू-बाजू के दू-चार झन घलो पँदोली दे ला धरलिन।

अतका ला सुनके वो सुते मनखे चुपचाप उठके बइठगे। मंगलू हा तको दूनो परानी खाली सीट मा बइठगें। लागिस छत्तीसगढ़िया के स्वाभिमान अँटिया के जागगे।


चोवा राम वर्मा 'बादल'

हथबंद, छत्तीसगढ़

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